
अजमेर. बॉयज इंजीनियरिंग कॉलेज में एसीए के दाखिलों में इस बार 'गणित मुसीबत नहीं बनेगी। सेंटर फॉर ई-गवर्नेंस ने बीसीए, स्नातकअथवा बारहवीं में गणित की अनिवार्यता की शर्त हटा दी है। इससे विद्यार्थियों को प्रवेश लेने में दिक्कत नहीं होगी।
सेंटर फॉर ई-गवर्नेंस की आरएमकेट परीक्षा के जरिए बीसीए उत्तीर्ण विद्यार्थियों को मास्टर ऑफ कम्प्यूटर एप्लीकेशन (एमसीए) में प्रवेश मिलते रहे हैं। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद ने दो साल पहले इसमें संशोधन किया। परिषद ने बीसीए अथवा बारहवीं कक्षा में विद्यार्थियों के लिए गणित विषय की अनिवार्यता लागू कर दी।
इससे सभी इंजीनियरिंग कॉलेज की दिक्कतें बढ़ गई। विद्यार्थियों के दबाव के चलते सेंटर फॉर ई-गवर्नेंस को दो साल से प्रवेश में रियायत देनी पड़ी। इस बार सेंटर ने गणित की अनिवार्यता की शर्त में रियायत दी है।
वरना बंद हो जाता कोर्स
बीसीए अथवा बारहवी में गणित विषय की अनिवार्यता से एमसीए कोर्स पर तलवार लटक गई थी। खासतौर इंजीनियरिंग कॉलेज ज्यादा परेशान थे। दो साल से हो रही किरकिरी को देखते हुए सेंटर फॉर ई-गवर्नेंस को अपना रवैया बदलना पड़ा। अब बीसीए, बीएससी आईटी, बीएससी कम्प्यूटर साइंस कोर्स के विद्यार्थी उच्च अध्ययन के लिए एमसीए में प्रवेश ले सकेंगे। इस संबंध में तकनीकी शिक्षा विभाग संयुक्त सचिव पुष्पा सत्यानी और कन्वीनर डॉ. अविनाश पंवार द्वारा जारी प्रवेश प्रक्रिया में विस्तृत जानकारी दी गई है।
कोई पात्र लाभार्थी की सूचना नहीं
छात्रवृत्ति योजना को लेकर विश्वविद्यालय अव्वल दर्जे का लापरवाह है। 13 साल में किसी पात्र छात्रा को स्कॉलरशिप देने की सूचना भी उपलब्ध नहीं है। प्रवेश नियम और प्रॉस्पेक्ट्स में जिक्र नहीं होना विश्वविद्यालय की उदासीनता दर्शाता है। ऐसा तब है जबकि कुलपति, कुलसचिव, प्रवेश समिति और अधिकारियों की निगरानी में प्रोस्पेक्टस तैयार किया जाता है।
कम विद्यार्थी यानि मुसीबत कम
उदयपुर के एमएल सुखाडिय़ा, जोधपुर के जयनारायण व्यास, जयपुर के राजस्थान विश्वविद्यालय, सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय जैसे बड़े कॉलेज की तुलना में 10 से 15 हजार विद्यार्थी पढ़ते हैं। यहां छात्राओं की संख्या भी चार-पांच हजार तक पहुंच चुकी है। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में महज 1100-1200 विद्यार्थी पढ़ते हैं। कम विद्यार्थी होना यहां फायदेमंद है। इसकी आड़ में केंद्र और राज्य सरकार की कई योजनाएं लागू नहीं हो पाती हैं।