
अजमेर.
नगर निगम के बहुचर्चित 13 व्यावसायिक नक्शा विवाद प्रकरण में संभावित निलम्बन से बचाव के लिए हाइकोर्ट पहुंचे महापौर धर्मेन्द्र गहलोत के मामले में अब सुवाई 8 अप्रेल को होगी। महापौर ने उच्च न्यालालय में याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि राज्य सरकार ने द्वेषतावश उन्हें नोटिस दिया है। गहलोत ने याचिका में मांग की कि सरकार की संभावित निलम्बन की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।
यह कहा कोर्ट ने
महापौर की याचिका पर उच्च न्यायालय ने सरकार को जवाब देने के लिए एएजी को कॉपी देने के निर्देश दिए थे। गुरुवार को सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता ने जवाब देने के लिए समय मांगा। वहीं महापौर के अधिवक्ता ने स्टे दिए जाने की मांग की। गौरतलब है कि राज्य सरकार द्वारा गठित कमेटी ने स्वीकृत नक्शों को नियम विरुद्ध मानते हुए महापौर तथा उपायुक्त को प्रथम दृष्टया दोषी माना है। इस सम्बन्ध में नक्शे खारिज करने की अनुशंसा के साथ तत्कालीन सहायक व कनिष्ठ अभिंयता को गड़बड़ी का दोषी माना है।
उपायुक्त को आयुक्त के अधिकार देना गलत
13 व्यावसायिक नक्शों को स्वीकृत करने के मामले में डीएलबी ने महापौर द्वारा उपायुक्त को आयुक्त के अधिकार देने को गलत माना है। इसके अलावा आयुक्त के सुने बिना किया नक्शा बहाल करने, तकनीकी बिन्दुओं को अनदेखा करने, पार्षदों को साधारण सभा में नक्शों को लेकर विवरण की जानकारी नहीं देने के मामले में नोटिस जारी जवाब मांगा था।
जवाब नहीं देने की स्थिति में महापौर के खिलाफ नगर पालिका अधिनियम 2009 की धारा 39 के तहत कार्रवाई की बात कही गई थी। महापौर ने 26 मार्च को डीएलबी को 50 पन्ने का अपना जवाब पेश कर दिया था। महापौर ने अपने जवाब में रिकॉर्ड देखने तथा उसके बाद ही जवाब देने के लिए समय मांगा था।