महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय करेगा शुरुआत। प्रयोग सफल हुआ तो अन्य परीक्षाओं में किया जाएगा इसे लागू।
कागजों में दफन पड़ी कॉपियों की ऑनस्क्रीन जांच योजना अब परवान चढ़ेगी। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय कैंपस में संचालित सेमेस्टर परीक्षाओं की कॉपियां कम्प्यूटर पर जंचवाने की शुरुआत करेगी। यह प्रयोग सफल रहा तो अन्य परीक्षाओं में भी इसे लागू किया जाएगा।
विश्वविद्यालय ने मूल्यांकन और परिणाम संबधित कार्य को हाइटेक बनाने के लिए विस्तृत कार्ययोजना बनाई थी इसके तहत सालाना परीक्षाओं की कॉपियों की कम्प्यूटर पर ऑनस्क्रीन जांच को शामिल किया गया।
बेंगलूरू की फर्म से परीक्षात्मक कार्य के कम्प्यूटरीकरण पर चर्चा हुई। फर्म के प्रतिनिधियों ने ऑनस्क्रीन जांच, कॉपियों में बार कोडिंग, अवार्ड लिस्ट और अन्य कामकाज का प्रजंटेशन दिया। बाद में मामला कागजों में दब गया। प्रधानमंत्री की डिजिटल इंडिया योजना के चलते कुलपति प्रो. कैलाश सोडाणी ने नए सिरे से योजना पर चर्चा शुरू की है।
परीक्षण सेमेस्टर परीक्षाओं से
विश्वविद्यालय वृहद् स्तर पर कॉपियों की ऑनस्क्रीन जांच से पहले परीक्षण करना चाहता है। सबसे पहले कैंपस में संचालित पाठ्यक्रमों की कॉपियों को ऑनस्क्रीन जंचवाया जाएगा। इसकी जांच में लगने वाला समय, खर्चे, तकनीकी बिन्दुओं पर विचार-विमर्श होगा। योजना सफल रही तो चरणबद्ध तरीके से इसे स्नातक और स्नातकोत्तर परीक्षाओं में लागू किया जाएगा।
यह हो सकते हैं फायदे
-कुलाधिपति के निर्देशानुसार समय पर परीक्षा और परिणाम-विषयवार कॉपियां जांचने में आसानी
-सर्वर से कनेक्टिविटी और विशेष प्रोग्राम से त्रुटियां कम
-कॉपियों के ई-फॉर्मेट में होने से रिकॉर्ड सहेजना आसान
-कॉपियों के गायब होने, कटने-फटने की संभावना कम
परीक्षण के तौर पर हम कैंपस में होने वाली सेमेस्टर परीक्षाओं की कॉपियां ऑन स्क्रीन जंचवाने की शुरुआत करेंगे। उच्च स्तरीय चर्चा के बाद फिर चरणबद्ध तरीके से दूसरी परीक्षाओं में इसे लागू किया जाएगा।
-प्रो. कैलाश सोडाणी, कुलपति मदस विवि