
अजमेर. विद्यार्थियों को महर्षि दयानंद सरस्वती यूनिवर्सिटी में बी.फार्मा, बीए-बीएससी बीएड और पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड लॉ कोर्स में भी दाखिले मिल सकेंगे। सत्र 2020-21 से यह कोर्स शुरू होंगे। 32 साल में यह पहला मौका होगा, जबकि यूनिवर्सिटी में स्नातक स्तर के कोर्स प्रारंभ किए जा रहे हैं।
1987 में स्थापित महर्षि दयानंद सरस्वती यूनिवर्सिटी में कला, वाणिज्य और विज्ञान में स्नातकोत्तर विषयके कोर्स ही संचालित हैं। इनमें इतिहास, जनसंख्या अध्ययन, रिमोट सेंसिंग, माइक्रोबायलॉजी, मैनेजमेंटस्टडीज, पत्रकारिता, एलएलएम, हिंदी और अन्य कोर्स हैं। कैंपस में संचालित कोर्स में महज 800-900 विद्यार्थी पढ़ते हैं। जबकि विद्यार्थियों का रुझान स्नातक स्तरीय कोर्स में प्रवेश लेकर कॅरियर बनाने में ज्यादा है।
फाइव ईयर इंटीग्रेटेड लॉ कोर्स
कई विश्वविद्यालयों और उनसे सम्बद्ध कॉलेज में पांच वर्षीय एकीकृत विधि पाठ्यक्रम संचालित हैं। विद्यार्थियों के विभिन्न क्षेत्रों में प्लेसमेंट हो रहे हैं। लिहाजा महर्षि दयानंद सरस्वती यूनिवर्सिटी भी कैंपस में पांच वर्षीय बीए, बीएससी और बी.कॉम एलएलबी पाठ्यक्रम शुरु करेगा। बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण या इसके समकक्ष विद्यार्थी प्रवेश ले सकेंगे। एकेडेमिक कौंसिल पाठ्यक्रम मंजूर कर चुका है।
चलेगा बी.फार्मा कोर्स
कैंपस में बैचलर ऑफ फार्मास्यूटिकल कोर्स भी शुरू होगा। यह कोर्स मेडिकल की दुकान खोलने अथवा दवा का कामकाज करने वालों के लिए जरूरी है। यूनिवर्सिटी भारत विद्या अध्ययन संकुल की द्वितीय मंजिल पर यह कोर्स शुरू करेगा। इंडियन मेडिकल और फार्मास्यूटिकल काउंसिल को पत्र भेजकर औपचारिकता पूरी की जा रही हैँ।
चार वर्षीय बीए-बीएससी बीएड कोर्स
यूनिवर्सिटी में मौजूदा वक्त दो वर्षीय बीएड कोर्स संचालित हैं। इसमें सौ सीट हैं। अब कैंपस में चार वर्षीय बीए-बीएससी बीएड कोर्स खोला जाएगा। इसमें प्री.बीएड एज्यूकेशन टेस्ट 2020 में उत्तीर्ण विद्यार्थियों को प्रवेश मिलेंगे। यह कोर्स रीजनल कॉलेज सहित कई बीएड कॉलेज में संचालित हैं। कोर्स महर्षि वाल्मीकि सामाजिक विज्ञान भवन में चलेगा।
विद्यार्थियों के लिओ फाइव ईयर इंटीग्रेटेड लॉ, बीए-बीएससी बीएड और बी-फार्मा कोर्स शुरू करने का फैसला किया है। सभी औपचारिकताएं मौजूदा सत्र तक पूरी की जाएंगी।
प्रो. आर. पी. सिंह, कुलपति महर्षि दयानंद सरस्वती यूनिवर्सिटी