अजमेर

Merry christmas: नहीं देखे होंगे आपने ये चर्च, फ्रांस और ब्रिटिश डिजाइनर्स का है ये कमाल

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Dec 25, 2018
church in ajmer city
church in ajmer city

रक्तिम तिवारी/अजमेर.

तत्कालीन ब्रिटिश राज से अजमेर मसीह धर्मावलंबियों का प्रमुख केंद्र रहा है। ब्रिटिश और फ्रांस के धार्मिक पुरोहितों धर्मावलंबियों ने यहां शिक्षा, चिकित्सा के विकास के अलावाकई नायाब चर्च बनवाए। यह चर्च अपनी डिजाइन और अद्भुत शैली के लिए अलग ही पहचान रखते हैं। इनमें फे्रंच-रोमन और एंग्लो इंडियन निर्माण शैली दिखाई देती है। भारत सहित विश्व में यह चर्च काफी ख्यातनाम हैं।

इमेक्यूलेट कंसेप्शनल चर्च
सेंट एन्सलम्स स्कूल स्थित इमेक्यूलेट कंसेप्शनल चर्च अपनी स्थापत्य कला और भव्यता के लिए जाना जाता है। इस चर्च में कैथोलिक धर्मावलंबी प्रतिवर्ष क्रिसमस, गुड फ्राइडे सहित वैवाहिक और कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं। चर्च की भीतरी डिजाइन, संगमरमर का फर्श, फानूस और अन्य सामग्री देखने लायक है। चर्च परिसर के निकट ही डॉयसिस ऑफ अजमेर के बिशप का निवास है। अजमेर डायसिस की कमान अब तक बिशप कैमाउन्ट, बिशप पायस, बिशप गुइडो, बिशप लियो डिमेलो, बिशप इग्नेशियस मेनेजेस संभाल चुके हैं। मौजूदा वक्त बिशप पायस थॉमस डिसूजा के पास कमान है।

रॉबसन मेमोरियल चर्च

आगरा गेट स्थित रॉबसन मेमोरियल चर्च भी अपनी उत्कृष्ट शैली के लिए मशहूर है। यह चर्च सौ साल भी पुराना है। यह अजमेर के केंद्र बिंदू पर स्थित है। यह चर्च ऑफ नॉर्दन इंडिया (सीएनआई) के अधीन है। अजमेर शहर की दूरी भी आगरा गेट स्थित चर्च से ही मापी जाती हैं। चर्च में प्रोटेस्टेंट धर्मावलंबी क्रिसमस और अन्य समारोह पर कार्यक्रम करते हैं। चर्च में क्रिसमस, गुड फ्राइडे सहित वैवाहिक समारोह, नामकरण संस्कार (बैप्टिज्म) और अन्य कार्यक्रमों का आयोजन होता है।

सेंटीनेरी मेथॉडिस्ट चर्च

जयपुर रोड पर सेंटीनेरी मेथॉडिस्ट चर्च सौ साल पुराना है। यह चर्च भी अपनी कलात्मक डिजाइन और आंतरिक सजावट के लिए पहचाना जाता है। यहां भी क्रिसमस, गुड फ्राइडे और अन्य मौकों पर कार्यक्रम होते हैं। प्रत्येक रविवार को मसीह धर्मावलंबी संडे मास के लिए आते हैं।

अवर लेडी ऑफ सेवन डॉलर्स चर्च

भट्टा स्थित अवर लेडी ऑफ सेवन डॉलर्स चर्च सौ साल पुराना है। वर्ष 1913 में फादर फर्डिनेंड इसके पहले पुरोहित बने थे। बाद में फादर साइमन ने चर्च का विस्तार किया। वर्ष 2012-13 में इस चर्च का शताब्दी वर्ष मनाया गया। यहां सोफिया भट्टा हिंदी माध्यम स्कूल संचालित है। इस चर्च का डिजाइन का प्रभु यीशू के क्रॉस की तर्ज पर बनाया गया है।

सेंट मेरीज चर्च पालबीछला

सेंट मेरीज चर्च तोपदड़ा भी सौ साल से ज्यादा पुराना है। यहां ब्रिटिशकाल के दैारान एंग्लो इंडियन धर्मावलंबी ही आते रहे थे। आजादी के बाद चर्च में अजमेर और आसपास के इलाकों के धर्मालंबियों की आवाजाही शुरू हुई। यह चर्च अपनी आंतरिक सजावट, पुराने फर्नीचर, वुडन रूफ और संगमरमर के कामकाज के लिए काफी प्रसिद्ध है।

Published on:
25 Dec 2018 11:01 am