
अजमेर.
महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में शनिवार को तेज हवा से सौ फीट पर लहराता तिरंगा फट गया। फटा झंडा लहराता देखकर छात्रों ने नाराजगी जताई। मुख्य कुलानुशासक और अधिकारियों ने जयपुर से कर्मचारी को बुलाकर झंडे को नीचे उतरवाया।
विश्वविद्यालय में सौ फीट पर पोल पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया हुआ है। शनिवार को तेज हवा चलने से ध्वज फट गया। फटा ध्वज लहराता देख छात्र नाराज हो गए। पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष भगवान सिंह चौहान, मोहित जैन और अन्य ने इसे राष्ट्रीय अपमान बताया। सुरक्षाकर्मी भी मौके पर पहुंच गए। सूचना मिलने पर मुख्य कुलानुशासक प्रो. सुब्रतो दत्ता और पुलिस भी पहुंची। प्रो. दत्ता ने तत्काल ध्वज फहराने वाली फर्म को सूचना दी।
पहले भी फट चुके हैं ध्वज
वर्ष 2017 में सौ फीट पोल पर तिरंगा फहराया गया था। उसी साल 5 और 6 दिसंबर को ओखी तूफान के चलते मौसम बिगड़ गया। ऐसे में विश्वविद्यालय ने तिरंगा उतार दिया था। इसी तरह पिछले साल मार्च में खराब मौसम और तेज हवाओं के चलते तिरंगा उतार दिया गया। उसके बाद यह 15 अगस्त को ही तिरंगा नजर आया था। इसके पश्चात हाल में 22 जनवरी को प्रशासन ने फिर तिरंगा फहराया था।
छात्रों ने बताया राष्ट्रीय अपमान
छात्रनेता भगवान सिंह ने बताया कि फटा हुआ तिरंगा फहराना राष्ट्रीय अपमान है। ध्वज उतारने के लिए लगी मशीन खराब पड़ी है। इसके चलते प्रशासन ने इसे उतारने में देरी की। वहीं छात्रनेता मोहित जैन ने बताया कि राष्ट्रीय ध्वज फटा देखकर छात्रों ने तत्काल सूचना दी। लेकिन इसे उतारने में विलंब हुआ।
यह है ध्वज फहराने-उतारने की रस्म
भारत में प्राचीन काल से ध्वज को फहराने और उतारने की रस्म निर्धारित है। सतयुग और द्वापर युग से लेकर रियासतों के जमाने में सूर्योदय के साथ ध्वज फहराया जाता था। इस दौरान ढोल-नगाड़े, दुंदुभी या शहनाई बजाई जाती थी। इसी तरह सूर्यास्त होने से पूर्व ध्वज को इसी तरह सम्मानपूर्वक उतारा जाता था।