नौसेना दिवस आज : 1971 के युद्ध में निभाई थी पाक के खिलाफ भागीदारी
दिनेश कुमार शर्मा
अजमेर.
बात चाहे देश की आजादी के आंदोलन में प्राण न्यौछावर करने की हो या फिर दुश्मन देश के विरुद्ध अदम्य साहस के प्रदर्शन की। अजमेर का नाम स्वर्ण अक्षरों में ही लिखा गया।
स्वतंत्रता आंदोलन में कई सैनानियों ने जहां प्राणों की आहुति दी तो कुछ ने युद्ध में दुश्मन देश के खिलाफ जमकर लोहा लिया। इन्हीं में शामिल हैं अजमेर के जगदीश सिंह सिकरवार और दीपक सिकंद।
दोनों 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के गवाह रहे हैं। इन्होंने भारतीय नौसेना में शामिल रहकर पाकिस्तान के खिलाफ जांबाजी दिखाई। नौसेना दिवस के मौके पर अजमेर के दोनों योद्धाओं ने ताजा की युद्ध की यादें।
पानी में मिला दिया खैबर
वैशाली नगर निवासी जगदीश सिंह सिकरवार (83) ने बताया कि भारत-पाक युद्ध में डिस्ट्रोयर जहाज आईएनएस रणजीत पर तैनात थे। मिशन कराची के तहत हमला बोला गया।
भारतीय सैनिकों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए मिसाइल बोटों के जरिए पाकिस्तान के जहाज शाहजहां और खैबर को अरब सागर में ही खत्म कर दिया। उन्हें मैंशन इन डिस्पैच वीरता पुरस्कार एवं मेरिटोरिस सर्विस मैडल से नवाजा गया।
तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैलसिंह ने उन्हें सम्मानित किया व तत्कालीन प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी के साथ लंच का मौका मिला।
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छह माह बाद ही मिला मौका
शास्त्री नगर निवासी मेयो कॉलेज के छात्र रहे दीपक सिकंद (70) भारत-पाक वॉर के समय नौसेना में सब लेफ्टिनेंट (जूनियर ऑफिसर) थे। वे पनडुब्बी में तैनात रहे।
जुलाई 1971 में नेवी ज्वॉइन करने के मात्र 6 महीने बाद ही उन्हें देश के लिए युद्ध में हिस्सा लेने का मौका मिला। उन्होंने बताया कि पनडुब्बी में मूवमेंट अरब सागर में थी।
किनारे के स्टाफ से ही उन्हें संदेश प्राप्त हो पाते थे। उन्हें वॉर पार्टिशिपेशन मैडल से सम्मानित किया गया।
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गर्व का होता अहसास
भारतीय नौसेना की उपलब्धियों की जानकारी देने के लिए हर वर्ष 4 दिसम्बर को नौसेना दिवस मनाया जाता है। सन् 1971 में इस दिन के रूप में चुना गया। ऑपरेशन ट्राइडेंट के दौरान भारतीय नौसेना ने पीएनएस खैबर सहित अन्य जहाजों को नष्ट किया। भारतीय नौसेना ने जहाज पर मार करने वाली एंटी शिप मिसाइल से हमला बोला।
कैप्टन अशोक तिवारी, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी
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