अजमेर

अगर शुरू होते ये कोर्स तो मिलता विद्यार्थियों को फायदा

राजभवन ने दिए थे विश्वविद्यालयों को निर्देश। ना पाठ्यक्रम बने ना हुई शुरूआत।
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Mar 11, 2020
new courses
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रक्तिम तिवारी/अजमेर.

महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के लिए राजभवन के आदेश भी खास नहीं हैं। कुलाधिपति द्वारा सुझाए गए कोर्स को विश्वविद्यालय भुला चुका है। साथ ही इनके पाठ्यक्रम बनाने के प्रयास तक नहीं किए। यह कोर्स शुरू होते तो विद्यार्थियों को फायदा मिल सकता था।

राज्यपाल प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति हैं। उनकी अध्यक्षता में प्रतिवर्ष कुलपतियों की समन्वय समिति की बैठक होती है। इनमें कुलपतियों से शैक्षिक स्थिति, उच्च शिक्षा में नामांकन, विभागवार शिक्षक, शोध और नवीन पाठ्यक्रमों पर चर्चा होती है। इसी कड़ी में महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय भी कई बार बैठक में शामिल हुआ था।

यह कोर्स होने थे शुरू
आर्कियोलॉजी, फोर्ट आर्किटेक्चर, हिस्ट्री ऑफ बैटल्स, टूरिज्म एन्ड हॉस्पिटिलिटी, माइनिंग एन्ड जियोलॉजी, वाटर साइंस, इंटरनेशनल रिलेशन, लॉ ऑफ बॉर्डर, ह्मूमन राइट्स, सोशल वर्क, डिप्लोमा इन क्रिमनोलॉजी, फाइनेंशियल कंट्रोल एन्ड मार्केटिंग मैनेजमेंट

कुलपति बदले, कोर्स अटके
इस अवधि में विश्वविद्यालय में तीन स्थाई और दो अस्थाई कुलपति बदल गए। लेकिन राजभवन द्वारा सुझाए कोर्स प्रारंभ नहीं हो पाए। हालांकि विश्वविद्यालय ने एकेडेमिक कौंसिल की बैठक में तात्कालिक कुलपति को इनके कोर्स बनाने के लिए अधिकृत किया भी किया, पर बात आगे नहीं बढ़ सकी। यह कोर्स सामाजिक विज्ञान, विज्ञान, विधि और प्रबंध अध्ययन संकाय से जुड़े हैं।

विद्यार्थी पढ़ रहे पारम्परिक कोर्स
विश्वविद्यालय परिसर में विद्यार्थी एकाध पाठ्यक्रम को छोडकऱ बरसों से पारम्परिक कोर्स पढ़ रहे हैं। इनमें कॉमर्स, कम्प्यूटर साइंस, इतिहास, बीएड, राजनीति विज्ञान, एमबीए, प्योर एन्ड एप्लाइड केमिस्ट्री, पर्यावरण अध्ययन जूलॉजी, बॉटनी, जनसंख्या अध्ययन, फूड एन्ड न्यूट्रिशियन शामिल हैं। रिमोट सेंसिंग, उद्यमिता में एमबीए, सर्टिफिकेट इन बर्डिंग, सोशल वर्क जैसे कुछेक कोर्स ही नवाचार की श्रेणी में शामिल हैं। हालांकि नए सत्र से यूनिवर्सिटी ने फाइव इंटीग्रेटेड लॉ, बीपीएड, चार वर्षीय बीए, बीएससी बीएड, एमपीएड कोर्स चलाने का फैसला किया है।

यह योजनाएं भी भूला प्रशासन...
-परिसर में विद्यार्थियों के लिए एफ.एम रेडियो
-सभी विभागों में स्मार्ट क्लासरूम (अब बनाने का फैसला)
-रिमोट सेंसिंग तकनीक से ई-लेक्चर की व्यवस्था
-दूसरे विश्वविद्यालयों से शैक्षिक आदान-प्रदान

Published on:
11 Mar 2020 08:47 am