हाइवे और शहर में कई जगह वाहनों को लाइट जलाकर चलाना पड़ा।
रक्तिम तिवारी/अजमेर।
ओखी तूफान का असर गुरुवार को भी नजर आया। लगातार तीसरे दिन आसमान पर बादल मंडराते रहे। सूरज बादलों में लुकाछिपी करता रहा। सर्द हवाओं ने हाड़ कंपकंपाए रखे। लोगों को चमकदार धूप नसीब नहीं हुई। दिन के तापमान में बीते दो दिन में 6.1 डिग्री की गिरावट आ गई है। अधिकतम तापमान 19.7 और न्यूनतम तापमान 13.6 डिग्री रहा।
बुधवार की तरह गुरुवार को भी बादलों ने आसमान को घेरे रखा। बादलों के बीच सूरज कहीं नजर नहीं आया। लोग सुबह से धूप को तरसते रहे। कई इलाकों में मामूली टपका-टपकी हुई। सर्द हवाओं ने सिहरा दिया। पहाड़ों पर हल्की धुंध छाई रही। हाइवे और शहर में कई जगह वाहनों को लाइट जलाकर चलाना पड़ा।
सर्दी से राहत के जतन
अलसुबह से ही कई जगह चाय की थडिय़ों, सड़कों के किनारे लोग सूखी पत्तियों और लकडिय़ों से अलाव जलाकर सर्दी से राहत पाते दिखे। घरों-दफ्तरों में भी लोगों को हीटर जलाकर बैठना पड़ा। पड़े। दिनभर लोग सिर से पैर तक ऊनी कपड़ों में लिपटे रहे। सड़कों पर भी रौनक नहीं दिखी। सर्दी के कारण रात के तापमान में भी 4 से 6 डिग्री की गिरावट आ गई है।
पड़ेगी कड़ाके की सर्दी
मौसम विभाग का मानना है कि पर्वतीय इलाकों में बर्फबारी से कड़ाके की सर्दी पड़ेगी। इससे ठंड का असर और बढ़ सकता है। घने कोहरे के अलावा कई इलाकों में तापमान में गिरावट भी हो सकती है। मैदानी और पहाड़ी इलाकों में तेज सर्दी से पाला पडऩे के भी आसार हैं।
और बढ़ेगी ठंडक
दिसम्बर के अंत और जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ेगी। इसका असर मावठ, कोहरे और बर्फीली हवाओं के बतौर नजर आएगा। अजमेर में इस दौरान न्यूनतम तापमान 3 से 5 डिग्री के बीच पहुंच जाता है। जनवरी-फरवरी के दौरान यहां मावठ होती है। यह फसलों के लिए अच्छी मानी जाती है।
खुशनुमा मौसम के लिए विख्यात
अजमेर अपने खुशनुमा मौसम के विख्यात है। यहां कभी सर्दी, गर्मी, बरसात का मौसम बेहद संतुलित हुआ करता था। पहाड़ों और हरियाली के कारण गर्मी में भी ठंडी हवाएं चलती थी। सर्दी का मौसम भी जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश जैसा हुआ करता था। ग्लोबल वार्मिंग के चलते अजमेर में भी मौसमी बदलाव का असर पड़ा है। गर्मियों में तापमान 46 डिग्री तक पहुंच जाता है।
पिछले दिनों में तापमान
(अधिकतम-न्यूनतम)
3 दिसम्बर-27.1,12.8
4 दिसम्बर-25.8, 11.3
5 दिसम्बर-22.1, 16.0
6 दिसम्बर-19.7, 13.6