डेंगू रोग का प्रारंभिक उपचार नहीं लेने एवं लापरवाही बरतने पर प्लेट लेट्स की शरीर में कमी हो जाती है। आखिर में प्लेट लेट्स शरीर में चढ़ाया जाता है।
अजमेर
सावधान! अगर आपके घर में कूलर में पानी बदले सात दिन से अधिक समय हो गया हो तो उसे तत्काल बदलें। छत पर रखे सामान, कबाड़ आदि में पानी भरा हो तो खाली करें। इस पानी में कहीं डेंगू के मच्छर तो नहीं पनप रहे हैं। इन मच्छरों से बच्चों, बुजुर्गों को डेंगू का खतरा उत्पन्न हो सकता है।
स्वास्थ्य के प्रति जागरुकता आर्थिक एवं शारीरिक नुकसान से बचा सकती है। डेंगू रोग की चपेट में आने एवं समय पर उपचार नहीं मिलने पर हालत गंभीर हो सकती है। बेहतर यही है कि डेंगू रोग से पूर्व ही बचाव किया जाए। डेंगू रोग प्राय: शहरी क्षेत्रों का रोग है। डेंगू का मच्छर साफ पानी में पनपता है। एडीज एजिप्टी नामक संक्रमित मादा मच्छर से डेंगू रोग हो जाता है। डेंगू रोग का प्रारंभिक उपचार नहीं लेने एवं लापरवाही बरतने पर प्लेट लेट्स की शरीर में कमी हो जाती है। आखिर में प्लेट लेट्स शरीर में चढ़ाया जाता है।
यह हैं डेंगू रोग के लक्षण
-अचानक तेज बुखार
-सिदर्द एवं बुखार
-आंखों के पीछे दर्द
-मांसपेशी में दर्द एवं बदनदर्द
-स्वाद का पता नहीं चलना
-चक्कर आना, जी घबराना एवं उल्टी आना।
चिकित्सक से लें परामर्श
डेंगू रोग के लक्षण नजर आने पर शीघ्र नजदीकी चिकित्सक से परामर्श लें एवं दवाइयां लें। उपचार के लिए पैरासिटामोल टेबलेट का उपयोग करें।
यह बरतें सावधानी
-घर में कूलर को सप्ताह में एक बार साफ कर नया पानी भरें।
-घर की छत पर कबाड़ हटाएं।
-कबाड़ में भरे पानी को साफ करें।
-पुरानी टंकी, बाल्टियों पर लम्बे समय तक पानी भरकर नहीं रखें।
-अगर घरों के पास बरसात का साफ पानी भरा हो तो इसमें भी एंटीलार्वा एक्टिविटी कराएं।
-डेंगू का मच्छर दिन में काटता है, बच्चों को पूरी बांह के कपड़े पहनाएं।
जिले में डेंगू रोगियों की स्थिति
अजमेर जिले में जनवरी से अब तक डेंगू रोग पॉजीटिव मरीजों का आंकड़ा 33 तक पहुंचा है। हालांकि किसी भी डेंगू रोगी की मौत नहीं हुई है।
स्वास्थ्य दल आपके द्वार अभियान उपचारित
-207727 टंकियां उपचारित की गई।
-56673 में मिले लार्वा
-37820 कूलर उपचारित
-10515 में मिले लार्वा
-75807 कन्टेनर उपचारित
-35487 में मिले लार्वा
डेंगू रोग के मच्छर को पनपने से रोकने से बीमारी से बचा जा सकता है। स्वास्थ्य दल आपके द्वार अभियान में जिलेभर में घर-घर, स्कूल, अस्पताल, छात्रावासों में टंकियां, कूलर, कन्टेनर की जांच कर उपचारित किया गया।
-डॉ. के.के.सोनी, सीएमएचओ