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जेल में जगन गुर्जर की हत्या: जांच में क्या कुछ आया सामने, जानिए क्या बोले पुलिस महानिदेशक जेल अशोक राठौड़

'राजस्थान पत्रिका' से खास बातचीत में डीजी (जेल) राठौड़ ने कहा कि प्रदेश में अपराध नियंत्रण की सोच के साथ हार्डकोर बंदियों के चयन, स्थानांतरण व नई जेलों के निर्माण की रणनीति बनाई जा रही है।
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अजमेर

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Santosh Trivedi

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मनीष कुमार सिंह

Jul 15, 2026

Jagan Gurjar murder Accused vishnu

आरोपी विष्णु सिंह और जगन गुर्जर की फाइल फोटो: पत्रिका

अजमेर। राजस्थान की जेलों में बंदियों की बढ़ती संख्या, हाई सिक्योरिटी जेल में जगन गुर्जर हत्याकांड, नई जेलों के निर्माण और बंदियों के स्थानांतरण की नीति पर पुलिस महानिदेशक (जेल) अशोक कुमार राठौड़ ने कहा कि जेल प्रशासन की प्राथमिकता सुरक्षा के साथ अपराधियों के नेटवर्क को पनपने से रोकना है। उन्होंने कहा कि हाईसिक्योरिटी जेल को किसी भी कीमत पर अपराध का 'ब्रीडिंग सेंटर' नहीं बनने दिया जाएगा।

'पत्रिका' से खास बातचीत में डीजी (जेल) राठौड़ ने कहा कि प्रदेश में अपराध नियंत्रण की सोच के साथ हार्डकोर बंदियों के चयन, स्थानांतरण व नई जेलों के निर्माण की रणनीति बनाई जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि अपराध नियंत्रण के लिए सक्रिय पुलिसिंग से गिरफ्तारियां बढ़ेंगी तो जेलों पर दबाव बढ़ना भी स्वाभाविक है, लेकिन राज्य सरकार क्षमता विस्तार के जरिए इसका समाधान कर रही है।

सवाल- हाई सिक्योरिटी जेल में जगन हत्याकांड के बाद जेल प्रशासन का पक्ष सामने नहीं आया है। क्या जांच में कुछ सामने आया है?
डीजी राठौड़- मामले की न्यायिक (मजिस्ट्रियल) जांच चल रही है। वही जांच सर्वोपरि है। उसके निष्कर्ष आने के बाद ही आधिकारिक रूप से कोई टिप्पणी या कार्रवाई सामने आएगी।

सवाल- प्रदेश की जेलों में बंदियों की संख्या क्षमता से करीब 122 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इसे कैसे देखते हैं?
राठौड़- यह सक्रिय पुलिसिंग का भी परिणाम है। जब पुलिस प्रभावी कार्रवाई करेगी तो गिरफ्तारियां बढ़ेंगी और गिरफ्तार लोगों को जेल में ही रखा जाएगा। ऐसे में मौजूदा क्षमता पर दबाव आना स्वाभाविक है।

सवाल- बंदियों की संख्या की समस्या के समाधान के लिए क्या योजना है?
राठौड़: सरकार ने चार नई केंद्रीय जेलों के निर्माण को मंजूरी दी है। हमने प्रस्ताव बनाकर भेजा है कि भविष्य में बनने वाली केंद्रीय जेलें 3000 बंदियों की क्षमता वाली हों। वर्तमान में जोधपुर सेंट्रल जेल की क्षमता करीब 1572 है, लेकिन भविष्य की जरूरतों को देखते हुए बड़ी क्षमता की जेलें बनाई जाएंगी।

सवाल- क्या प्रदेश में अपराध प्रभावित क्षेत्रों के लिए अलग रणनीति बनाई जा रही है?
राठौड़: प्रदेश के सभी जिलों में अपराध की स्थिति एक समान नहीं है। कहीं साइबर अपराध अधिक हैं तो कहीं दूसरे अपराध। ऐसे क्षेत्रों में जेलों पर दबाव भी अधिक रहता है। अपराध प्रभावित क्षेत्रों में नई जेलों के निर्माण पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

सवाल- जेलों में भीड़ कम करने के लिए बंदियों को दूसरे जिलों में भेजा जा रहा है। इससे परिजनों को परेशानी होती है?
राठौड़: यह सही है। परिजनों ने कोई अपराध नहीं किया है और उनकी परेशानी को हम समझते हैं। इसलिए कोशिश करते हैं कि बंदियों को निवास स्थान के सबसे नजदीक कम क्षमता वाली जेल में स्थानांतरित किया जाए।

सवाल- हाई सिक्योरिटी जेल में बंदियों की संख्या कम होती जा रही है। क्या सुरक्षा को लेकर कोई चिंता है?
राठौड़- बिल्कुल नहीं। हाई सिक्योरिटी जेल केवल हार्डकोर अपराधियों के लिए है, लेकिन हमारी कोशिश यह भी है कि ऐसे अपराधियों को एक जगह इस तरह इकट्ठा न किया जाए कि जेल स्वयं अपराध का ब्रीडिंग सेंटर बन जाए। इसलिए बंदियों के चयन और स्थानांतरण में संतुलित नीति अपनाई जा रही है।