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राजस्थान: छोटे शहरों के युवा नौकरी-पढ़ाई के लिए विदेश जा रहे, ब्रिटेन-US से घटा मोह, इन देशों के लिए बढ़ा क्रेज

राजस्थान से नौकरी और पढ़ाई के लिए युवाओं के कदम विदेश में बढ़ रहे हैं। खास बात यह है कि छोटी जगह के युवाओं में भी विदेश जाने का क्रेज बढ़ा है। पांच साल में यह आंकड़ा 28 प्रतिशत तक पहुंच चुका है।
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अजमेर

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Santosh Trivedi

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रक्तिम तिवारी

Jul 13, 2026

Data Of Indian Students

percentage of Indian students studying in abroad (Image source: Gemini)

अजमेर। नौकरी और पढ़ाई के लिए युवाओं के कदम विदेश में बढ़ रहे हैं। पांच साल में यह आंकड़ा 28 प्रतिशत तक पहुंच चुका है । खासतौर पर ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन, चीन, यूएई पढ़ाई व रोजगार के लिए पसंदीदा बन चुके हैं । 2015-16 तक पढ़ाई, कॅरिअर और नौकरी के लिए विदेश जाने वाले युवाओं की संख्या 10 से 12 प्रतिशत तक सीमित थी । महज दस साल में तस्वीर काफी बदल चुकी है । अब यह आंकड़ा बढ़कर 28 प्रतिशत तक पहुंच गया है। ज्यादातर का लक्ष्य विदेश के कॉलेज-यूनिवर्सिटी में पढ़ाई, ट्रेवल और व्यापारिक गतिविधियों से जुड़ा है ।

राजस्थान के छोटे शहर बढ़ रहे आगे

राजस्थान के महानगराें और बड़े शहरों के अलावा अजमेर, ब्यावर, किशनगढ़, केकड़ी, पुष्कर, नसीराबाद, भीलवाड़ा, नागौर, डीडवाना-कुचामन और अन्य शहरों के युवा विदेश जा रहे हैं । इनकी संख्या 25 प्रतिशत तक पहुंच गई है । कई युवा ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन, चीन, यूएई और अन्य देशों में पढ़ाई और नौकरी के लिए पहुंच रहे हैं । आगामी दस साल में यह संख्या 35 प्रतिशत से ज्यादा पहुंचेगी ।

ब्रिटेन-अमरीका से दूरी

ब्रिटेन में जनवरी 2027 से पढ़ाई के बाद नौकरी ढूंढने की अवधि 2 साल से घटाकर 18 महीने होगी । अमरीका में पहले भारतीय आवेदक पड़ोसी देशों में स्थित अमरीकी दूतावासों में बी1/बी2 (व्यावसायिक और पर्यटक) वीजा के लिए साक्षात्कार बुक कर सकते थे। अब सुविधा समाप्त कर दी गई है ।

इन देशों के लिए बढ़ा रुझान

नीदरलैंड, स्विटजरलैंड, दक्षिणी अफ्रीका, इटली, फिलीपीन्स, हांगकांग, सिंगापुर, जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन आदि देश पढ़ाई, रोजगार के लिए पसंदीदा बन चुके हैं। आसान वीजा नियमों, पढ़ाई - रोजगार और कम फीस सहित अन्य सहूलियत के चलते लोगों का रुझान बढ़ रहा है ।

यह हैं विदेश जाने की वजह

  • 22 प्रतिशत : नौकरी-व्यापार के लिए
  • 28 प्रतिशत : उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई
  • 25 प्रतिशत : सैर-सपाटा पर्यटन के लिए
  • 10 प्रतिशत : किसी रोग का उपचार
  • 10 प्रतिशत : स्थायी प्रवास और आवाजाही
  • 05 प्रतिशत : सेमिनार-कॉन्फ्रेंस के लिए

केस-1

अक्षिता ( बदला हुआ नाम ) ने वेलिंगटन में बॉटनी में रिसर्च के लिए प्रवेश लिया है । वह रिसर्च के साथ विक्टोरिया यूनिवर्सिटी में क्लास भी ले रही हैं। कॅरिअर में इसका फायदा होगा ।

केस-2

अर्पित (बदला हुआ नाम) ने जर्मनी में एमबीए के लिए प्रवेश लिया । डिग्री पूरी करने के बाद स्टुटगार्ट में सिंथेवो में नौकरी कर रहे हैं ।

एक्सपर्ट व्यू

अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों में रिसर्च और स्पेशल कोर्स के साथ नौकरी के चलते युवाओं का रुख विदेश की तरफ बढ़ रहा है । औसतन यह आंकड़ा 28 प्रतिशत तक पहुंच गया है । बेहतर अवसर, कॅरिअर में फायदा और त्वरित ग्रोथ इसकी सबसे बड़ी वजह है । देश में आइआइटी-आइआइएम और अन्य संस्थानों से प्लेसमेंट लेकर भी युवा विदेश जाने को तवज्जो देने लगे हैं ।

  • डॉ. अनूप आत्रेय, अर्थशास्त्र विभाग, एसपीसी-जीसीए, अजमेर