
Dacoit Jagan Gurjar Murder (Patrika Photo)
Dacoit Jagan Gurjar Murder: अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में दस्यु जगन गुर्जर की हत्या ने जेल प्रशासन के सुरक्षा दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस जेल को प्रदेश के सबसे सुरक्षित कारागारों में गिना जाता है, वहां एक हार्डकोर बंदी की उसके ही साथी कैदी द्वारा हत्या कर दिए जाने से सुरक्षा व्यवस्था की कई गंभीर खामियां उजागर हुई हैं। सबसे बड़ा सवाल जेल के उस सेल को लेकर उठ रहा है, जहां यह वारदात हुई और वहां लगा सीसीटीवी कैमरा बंद मिला।
'पत्रिका' की पड़ताल में सामने आया है कि जेल परिसर में लगे कुल 318 सीसीटीवी कैमरों में से कई कैमरे बंद या खराब पड़े हैं। जिस सेल में जगन गुर्जर बंद था, वहां लगा कैमरा भी काम नहीं कर रहा था। जांच के दौरान यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि कैमरे के लेंस पर टूथपेस्ट लगा हुआ था, ताकि उसकी विजिबिलिटी खत्म की जा सके।
हालांकि, कुछ अधिकारी इस कैमरे को पहले से ही खराब बता रहे हैं। ऐसे में अब यह सवाल उठ रहा है कि यदि कैमरा पहले से खराब था, तो उसे समय रहते ठीक क्यों नहीं कराया गया? साथ ही, ऐसे हार्डकोर बंदियों को उस खराब कैमरे वाली सेल में रखने का निर्णय किस आधार पर लिया गया?
जेल में हार्डकोर बंदियों के लिए चार वार्ड बनाए गए हैं। प्रत्येक वार्ड में चार ब्लॉक और हर ब्लॉक में छह सेल हैं। जगन गुर्जर को वार्ड नंबर-2 के ब्लॉक नंबर-4 की सेल नंबर-5 में विष्णु सिंह उर्फ बौना के साथ रखा गया था। जेल प्रशासन का तर्क है कि दोनों के बीच किसी पुरानी रंजिश की जानकारी नहीं थी।
दोनों चूंकि भरतपुर-धौलपुर क्षेत्र के रहने वाले थे और उनकी भाषा-बोली एक जैसी थी, इसलिए उन्हें एक साथ रखा गया था। सूत्रों के अनुसार, शुरुआत में जगन अपने भाई पप्पू गुर्जर के साथ बंद था। लेकिन दोनों भाइयों के बीच मनमुटाव होने के बाद जगन की सेल बदल दी गई और 16 मई को विष्णु को उसके साथ शिफ्ट कर दिया गया।
जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि जगन अक्सर विष्णु के साथ बातचीत के दौरान अभद्र भाषा का इस्तेमाल करता था। माना जा रहा है कि इसी वजह से दोनों के बीच तनाव बढ़ा और विष्णु के मन में रंजिश पैदा हो गई, जो इस वारदात की वजह बनी।
जगन गुर्जर की हत्या के विरोध में मंगलवार को उसके परिजन और गुर्जर समाज के लोग जेएलएन अस्पताल की मोर्चरी के बाहर धरने पर बैठ गए। परिजनों ने मामले की सीबीआई जांच कराने, जेल में बंद जगन के भाई पप्पू गुर्जर की सुरक्षा बढ़ाने और उसे धौलपुर जेल स्थानांतरित करने की मांग की। तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए अस्पताल परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस के उच्च अधिकारियों ने परिजनों से समझाइश की, लेकिन वे अपनी मांगों पर अड़े रहे।
जगन गुर्जर के शव का पोस्टमॉर्टम मंगलवार शाम करीब 7 बजे के बाद हुआ। पोस्टमॉर्टम को लेकर मंगलवार सुबह से चल रहा गतिरोध करीब 11 घंटे बाद पुलिस-प्रशासन और गुर्जर समाज के प्रतिनिधियों के बीच लिखित सहमति बनने पर समाप्त हुआ। इसके बाद जेएलएन अस्पताल में मेडिकल बोर्ड ने एडीएम (सिटी) नरेंद्र मीणा और एएसपी (सिटी) हिमांशु जांगिड़ की मौजूदगी में पोस्टमॉर्टम किया गया। सुबह से समाज के लोग पोस्टमॉर्टम से पहले अपनी मांगों को लेकर मोर्चरी के बाहर धरने पर बैठे थे। कई दौर की वार्ता के बाद सहमति बनने पर प्रक्रिया पूरी कराई गई।
जगन के साथ विष्णु को 16 मई से रखा गया था। दोनों के बीच पहले से कोई रंजिश नहीं थी। सेल में जो सीसीटीवी कैमरा था, वह पहले से ही खराब था। जांच में यह भी देखने में आया है कि सीसीटीवी कैमरे पर टूथपेस्ट लगाकर उसके दृश्य को बाधित किया गया था।
-पारसमल जांगिड़, जेल अधीक्षक, हाई सिक्योरिटी जेल
Updated on:
30 Jun 2026 08:58 pm
Published on:
01 Jul 2026 07:00 am
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