
Rajasthan Five Deadliest Jail Murders (Patrika Creative Photo)
Rajasthan Five Deadliest Jail Murders: राजस्थान की जेलों को अपराधियों को सुधारने और उन्हें सुरक्षित रखने के लिए बनाया गया है। लेकिन समय-समय पर इन जेलों के भीतर से ऐसी खबरें आईं, जिन्होंने जेल प्रशासन की सुरक्षा के दावों की धज्जियां उड़ा दीं। आइए सिलसिलेवार तरीके से जानते हैं उन पांच बड़ी वारदातों के बारे में, जब जेल के अंदर ही मर्डर की स्क्रिप्ट लिखी गई।
चंबल का सबसे कुख्यात और खूंखार डकैत जगन गुर्जर, जिस पर डकैती, हत्या के प्रयास और फिरौती के 100 से ज्यादा मामले दर्ज थे। उसे राजस्थान की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में रखा गया था। 29 जून 2026 के दिन बैरक के अंदर जगन गुर्जर की हत्या कर दी गई।
बताया जा रहा है, भरतपुर के कुलदीप जघीना हत्याकांड के आरोपी ने जगन गुर्जर की हत्या की है। हार्डकोर बंदी दोनों एक ही बैरक में बंद थे। इस वारदात से पूरे पुलिस महकमे और जेल प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है।
हाई सिक्योरिटी जेल के भीतर वारदात की भनक लगते ही फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी और मोबाइल इन्वेस्टिगेशन यूनिट की टीमों को तुरंत मौके पर बुलाया गया। टीमों ने जेल और आसपास के पूरे इलाके को अपने नियंत्रण में लेकर घटना स्थल से फिंगरप्रिंट्स, फुटप्रिंट्स और अन्य महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए हैं।
यह राजस्थान के इतिहास का सबसे बड़ा जेल गैंगवार था। राजस्थान का कुख्यात गैंगस्टर आनंदपाल सिंह और उसका सबसे भरोसेमंद साथी बलवीर बानूड़ा बीकानेर जेल में बंद थे। दूसरी तरफ, उनकी विरोधी जयप्रकाश गैंग भी इसी जेल में थी।
साल 2014 की एक शाम, जब कैदी बैरक के बाहर घूम रहे थे, तब जयप्रकाश नाम के कैदी ने जेल सुरक्षा को धता बताते हुए अंदर छुपाई गई अवैध कट्टे से आनंदपाल और बलवीर पर फायरिंग कर दी। इस गोलीबारी में आनंदपाल के राइट-हैंड माने जाने वाले बलवीर बानूड़ा के सिर में गोली लगी और उसकी मौके पर ही मौत हो गई, जबकि आनंदपाल घायल हो गया था।
यह वारदात ऊपर दी गई घटना (बलवीर बानूड़ा की हत्या) के ठीक अगले ही मिनट में उसी जेल परिसर के भीतर हुई। जैसे ही हमलावर जयप्रकाश और उसके साथी रामनिवास ने बलवीर बानूड़ा को गोली मारी, जेल के अंदर मौजूद आनंदपाल सिंह और उसकी गैंग के अन्य गुर्गे भड़क गए।
आनंदपाल गैंग के कैदियों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए जयप्रकाश और रामनिवास को चारों तरफ से घेर लिया। उन्होंने जेल परिसर में पड़े भारी पत्थरों, ईंटों और लोहे के सरियों से पीट-पीटकर जयप्रकाश और रामनिवास की जेल के अंदर ही बेरहमी से हत्या कर दी। एक ही दिन, एक ही समय पर जेल के अंदर 3 मर्डर होने से पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया था।
यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रहा था। जयपुर बम धमाकों के मामले में सजा काट रहा पाकिस्तानी नागरिक और लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी शकरुल्लाह जयपुर जेल के वार्ड में बंद था। पुलवामा हमले के कुछ दिनों बाद, जेल के टीवी रूम में टीवी की आवाज बढ़ाने या कम करने को लेकर शकरुल्लाह की स्थानीय भारतीय कैदियों से बहस हो गई।
बहस इतनी हिंसक हो गई कि 4-5 भारतीय कैदियों ने मिलकर मेस के भारी बर्तनों और जेल के छज्जे से तोड़े गए पत्थरों से शकरुल्लाह के सिर पर ताबड़तोड़ वार कर दिए। सिर फट जाने के कारण शकरुल्लाह की जेल के भीतर ही तड़प-तड़प कर मौत हो गई।
जेलों में कैदी सिर्फ आपस में ही नहीं लड़ते, बल्कि कई बार वे जेल प्रशासन पर भी हमला कर देते हैं। साल 2010 में जोधपुर सेंट्रल जेल के भीतर सुरक्षा और बैरक चेकिंग को लेकर कुछ शातिर और हिंसक कैदियों की जेल प्रशासन से तनातनी चल रही थी।
एक दिन साजिश के तहत अपराधियों ने ड्यूटी पर तैनात जेलर भारत भूषण को अकेले पाकर उन पर हमला बोल दिया। कैदियों ने जेल के भीतर ही जुगाड़ से बनाए गए धारदार पत्थरों और नुकीले हथियारों से जेलर भारत पर कई वार किए।
इस हमले में गंभीर रूप से घायल जेल अधिकारी ने जेल परिसर के अंदर ही दम तोड़ दिया। इस घटना ने साबित किया था कि जेल के अंदर सरकारी अधिकारी भी सुरक्षित नहीं हैं। हिंसक और अनुशासनहीन कैदियों की जेलर भारत से जेल के नियमों और चेकिंग को लेकर ठन गई थी।
इन पांचों घटनाओं से एक बात साफ है कि जेल के भीतर हत्या करने के लिए अपराधी अक्सर जेल में चल रहे निर्माण कार्य के पत्थरों, लोहे की ग्रिल या रसोई के बर्तनों को ही अपना हथियार बना लेते हैं, जो जेल सुरक्षा के लिए आज भी एक बड़ी चुनौती है। जेल के भीतर सिर्फ कैदी ही सुरक्षित नहीं हैं, ऐसा नहीं है; कई बार कानून के रखवाले भी अपराधियों के सिरफिरेपन का शिकार हुए हैं।
Published on:
29 Jun 2026 08:19 pm
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