विशेष शाखा ने दरगाह सुरक्षा में छह प्रवेश द्वार पर लगाए गए डीएफएमडी को ठीक कर पुन: लगाया।
दरगाह सुरक्षा को लेकर आखिरकार पुलिस प्रशासन जाग गया। दरगाह के प्रवेश द्वार पर लगाए गए डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर (डीएफएमडी) सिस्टम मंगलवार शाम दुरुस्त कर दिए गए। वहीं यहां सुरक्षा में तैनात जवान मुस्तैद नजर आए। दरगाह थाना पुलिस ने भी दरगाह सुरक्षा पॉइंट का औचक निरीक्षण किए। ड्यूटी से नदारद मिलने वाले जवानों की गैरहाजिरी लगाई गई।
राजस्थान पत्रिका में मंगलवार के अंक में दरगाह में सुरक्षा व्यवस्था फेल, चाकू-पिस्तौल कुछ भी ले जाओ बेखौफ शीर्षक से प्रकाशित स्टिंग ऑपरेशन के बाद पुलिस व प्रशासन में हलचल मच गई। जहां पुलिस महानिरीक्षक(अजमेर रेंज) मालिनी अग्रवाल व एसपी राजेन्द्र सिंह ने दरगाह सुरक्षा को गंभीर मानते हुए उप अधीक्षक (दरगाह) ओमप्रकाश, थानाप्रभारी मानवेन्द्र सिंह को आदेश दिए।
उन्होंने दरगाह की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों के ड्यूटी पॉइंट पर औचक निरीक्षण व गैरहाजिर मिलने वालों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए। आलाधिकारियों के फटकार के बाद सक्रिय हुई दरगाह पुलिस ने मंगलवार को ड्यूटी पाइंट का औचक निरीक्षण किया। ड्यूटी पॉइंट से नदारद मिले आरएसी के दीवान की गैरहाजिरी डाली गई।
शाम तक सब ठीक
इधर एसपी सिंह के आदेश पर जिला विशेष शाखा ने दरगाह सुरक्षा में छह प्रवेश द्वार पर लगाए गए डीएफएमडी को ठीक कर पुन: लगाया गया। डीएफएमडी मशीन ठीक करने के साथ ही यहां दो तकनीकी कर्मचारियों को मशीनों के रखरखाव के लिए तैनात भी कर दिया। गौरतलब है कि दरगाह निजाम गेट समेत छह प्रवेश द्वार पर 8 डीएफएमडी मशीन लगाई गई है।
...भीड़ पर नाकाफी
दरगाह सुरक्षा को लेकर उठे सवाल पर पुलिस के आलाधिकारी व जिला विशेष शाखा के अधिकारियों का तर्क था कि उर्स की भीड़ में प्रवेश द्वार पर लगाए गए डीएफएमडी नाकाफी साबित होते है। भीड़ के दौरान प्रवेश द्वार पर मशीन को को खड़ा रखना ही चुनौती पूर्ण कार्य होता है। मालूम हो कि ख्वाजा साहब का उर्स रजब का चांद दिखने पर 18 या 19 मार्च से शुरू होगा।