
अजमेर.
लॉकडाउन के 45दिनों में लोगों की दिनचर्या में सकारात्मक बदलाव और नवाचार दिख रहे हैं। एक ओर लोग ऑनलाइन पढ़ाई और वर्क फ्रॉम के तहत व्यस्त हैं। वहीं खुद को व्यस्त रखने के लिए लेखन, स्वाध्याय, इंडोर गेम्स और परिवार संग गपशप करने का समय भी निकाला है। पत्रिका लॉकडाउन डायरीज में शहर के दो प्रमुख स्कूल निदेशकों ने कुछ यूं विचार साझा किए।
ताकि बाधित नहीं हो पढ़ाई
सम्राट पब्लिक स्कूल के प्राचार्य राजेंद्र शर्मा ने बताया कि लॉकडाउन से नियमित कक्षाएं लगाना संभव नहीं है। लिहाजा पूरी पढ़ाई ऑनलाइन हो गई है। विद्यार्थियों के लिए ई-लेक्चर, वीडियो अपलोड करना, शिक्षकों के साथ प्लानिंग की शुरुआत सुबह से करते हैं। विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान भी ऑनलाइन किया जा रहा है। ई-फाइलिंग सिस्टम से वे जरूरी पत्रावलियों को भी देखते हैं।
स्वाध्याय और लेखन का अवसर
राजेंद्र ने बताया कि नैतिक शिक्षा उनका प्रिय विषय है। लॉकडाउन ने उनकी बरसों पुरानी लेखन की मुराद पूरी की है। वे नैतिक मूल्यों पर आधारित लेखन और ई-व्याख्यान तैयार करते हैं। भारतीय संस्कृति पर आधारित पुस्तकों से स्वाध्याय करते हैं। सुबह उठने के बाद 1 घंटा योग-व्यायाम करते हैं। ताकि फिट रह सकें। वे खुद और शिक्षक फ्री-ऑनलाइन कोर्स करने में जुटे हैं।
पढऩे-लिखने का उत्तम समय
सावन पब्लिक स्कूल के निदेशक हरीश शर्मा ने बताया कि लॉकडाउन ज्ञानवर्²न आरै पढऩे-लिखने का उत्तम समय है। वे सुबह के शांत वातावरण में छत पर टहलने और व्यायाम करने के बाद परिवार संग कुछ वक्त बिताते हैं। मंदिर में पूजा-पाठ के बाद बच्चों के लिए वर्कशीट और शिक्षण सामग्री पर शिक्षकों से चर्चा करते हैं। कई विषयों की पुस्तकें पढ़ते हैं। तकनीकी ज्ञान को बढ़ाने के लिए बच्चों की सहायता से आईटी क्षेत्र को भी समझने की कोशिश कर रहे हैं।
रखें जीवन में सकारात्मक सोच
हरीश ने बताया कि जीवन में सकारात्मक सोच रखना बहुत आवश्यक है। कोरोना को भी इससे हराया जा सकता है। जुलाई-अगस्त में स्कूल निश्चित तौर पर खुलेंगे और बच्चों की पढ़ाई शुरू होगी। वे बच्चों की अतिरिक्त कक्षाएं लगाकर उनका कोर्स पूरा कराने की योजना बना चुके हैं। रोजाना शिक्षकों और बच्चों को फिट रहने के लिए व्यायाम, ज्ञानवद्र्धक पुस्तकें पढऩे को कहते हैं। ऑनलाइन शिक्षण ठीक है, पर छोटी उम्र के बच्चों पर अनावश्यक बोझ डालने की जरूरत नहीं है।