पुष्कर के राजकीय चिकित्सालय में क्वार्टर में फीस लेकर देखे गए रोगियों को निजी पर्चियों पर दवा लिख कर सरकारी अस्पताल से दिलवाई जा रही है,
पुष्कर के राजकीय चिकित्सालय में क्वार्टर में फीस लेकर देखे गए रोगियों को निजी पर्चियों पर दवा लिख कर सरकारी अस्पताल से दिलवाई जा रही है, जबकि निजी पर्ची पर नि:शुल्क दवा का कोई प्रावधान नहीं है। हालांकि निजी पर्चियों पर दी गई दवाइयों को रजिस्टर में भी अंकित किया जा रहा है। पुष्कर चिकित्सालय में ऐसा आज से नहीं बल्कि लम्बे समय से चल रहा है।
केस-1'
मोतीसर गांव से रोजना नाम के तीन वर्षीय बालक को परिजन ने डॉ. सुधीर माहेश्वरी के क्वार्टर पर फीस देकर दिखाया। उन्हें निजी पर्ची पर दवा लिख कर दी गई जो अस्पताल से मिली हैं। इसकी एन्ट्री चिकित्सालय के रजिस्टर में पंजीकरण संख्या 102704 पर इन्द्राज है।
केस - 2
कस्बे के संतोषी माता की ढाणी से आए युवराज नाम के रोगी से फीस लेकर क्वार्टर में मेडिकल चैकअप किया गया तथा उसे एक साधारण पर्ची पर दवाएं लिखकर दी गई। इस रोगी को भी डाक्टर की निजी पर्ची पर रजिस्टर में 102705 पंजीकरण संख्या पर इन्द्राज करके नि:शुल्क दवाई का लाभ दिलाया गया।
बिना मर्ज के लिख दी दवाइयां!
लापरवाही की हद यह है कि पर्ची में बीमारी का नाम तक नहीं लिखा गया। रोजना व युवराज दोनों ही रोगियों की पर्ची में बीमारी का जिक्र नहीं है।
चिकित्सक की ओर से रोगी की पर्ची पर डायग्नोसिस (रोगी की बीमारी का उल्लेख) नहीं लिखना पूरी तरह से गलत है। डॉक्टर की ओर से फीस लेकर रोगी को दी गई निजी पर्ची पर सरकारी चिकित्सालय से नि:शुल्क दवाइयों का लाभ नहीं दिया जा सकता है।
- डॉ.आर. के. गुप्ता, प्रभारी पुष्कर चिकित्सालय
चिकित्सक की ओर से रोगी की पर्ची पर डायग्नोसिस (रोगी की बीमारी का उल्लेख) नहीं लिखना पूरी तरह से गलत है। डॉक्टर की ओर से फीस लेकर रोगी को दी गई निजी पर्ची पर सरकारी चिकित्सालय से नि:शुल्क दवाइयों का लाभ नहीं दिया जा सकता है।
- डॉ.आर. के. गुप्ता, प्रभारी पुष्कर चिकित्सालय