
अजमेर . ...संपूर्ण विश्व में 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। इस दिन हम पर्यावरण से संबंधित मुद्दों पर जानकारी अर्जित करते हैं और हमारे बेहतर भविष्य के लिए पर्यावरण को सुरक्षित रखने की प्रतिज्ञा लेते हैं। वर्ष 1972 में घोषित होने के बाद 1973 से प्रतिवर्ष 5 जून को संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम द्वारा पर्यावरण में गिरावट के हालात के बारे में जानकारी देने एवं इस बारे में वैश्विक जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मनाया जाने लगा। इस वर्ष भारत को इस कार्यक्रम की मेजबानी करने का अवसर मिला है और इस वर्ष का विषय है 'प्लास्टिक प्रदूषण को हटाएं।
यह पर्यावरण कुछ कहना चाहता है हमसे
ये हवाओं की सरसराहट,
ये पेड़ों पर फुदकती चिडि़याओं की चहचहाहट,
ये समुंदर की लहरों का शोर,
ये बारिश में नाचते सुंदर मोर,
कुछ कहना चाहते हैं हमसे..!
जलीय जीव-जंतुओं को नुकसान
आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि इसमें से 50 टन प्लास्टिक का सिर्फ एक बार उपयोग होता है। अजमेर शहर के संदर्भ में देखा जाए तो, यहां भी पर्यावरण प्रदूषण की मात्रा बढ़ते चले जा रही हैं। आनासागर झील में व्यक्तियों द्वारा प्लास्टिक व मछलियों को दाना डालने की वजह से जल प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है और झील में मौजूद मछलियों और पक्षियों को नुकसान पहुंचता है। शहर की अन्य झीलें जैसे कि फॉयसागर झील का तो यह हाल है कि वह लगभग पूरी तरह सूख चुकी है।