
डॉ सुधीर श्रीवास्तव देश के प्रथम रोबोटिक कार्डियक सर्जन, पत्रिका फोटो
विदेश में एक प्राइवेट अस्पताल प्रबंधन की ओर से एक युवती की 4 लाख की सर्जरी नि:शुल्क करने से इंकार करने की घटना ने डॉ. सुधीर श्रीवास्तव को झकझोर दिया। खुद रोबोटिक कार्डियक सर्जन होने व अनुशंसा के बावजूद उनकी बात नहीं मानने पर उसी दिन निर्णय किया कि वे खुद रोबोट बनाएंगे और गरीबों एवं जरूरतमंदों को सस्ती दर पर रोबोटिक कार्डियक सर्जरी की सुविधा मुहैया करवाएंगे।
देश में पहली रोबोटिक कार्डियक सर्जरी करने वाले एवं अजमेर के जेएलएन मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस के पहले बैच के पूर्व छात्र एवं एसएस, मंत्रा रोबोट के ऑनर डॉ. सुधीर श्रीवास्तव ने आज खुद रोबोटिक कंपनी के मालिक के रूप में भारत सहित वैश्विक बाजार में भी अपनी पहचान बनाई है। जिन्होंने अजमेर मेडिकल कॉलेज के लिए दो रोबोट भेंट किए हैं। राजस्थान पत्रिका के साथ साक्षात्कार में डॉ. श्रीवास्तव भावुक हो गए।
जवाब : आज रोबोट लगाया है। वर्ष 1965 की हम्बल जर्नी थी। पहला बैच था। मेडिकल कॉलेज हमारे साथ बन रहा था। खिड़कियों में बैठकर पढ़ते थे। उस समय यह सीखा कि जो हमारे टीचर थे उन्होंने जो फाउंडेशन दी, इन्सपिरेशन दी आगे बढ़ने की, वह जीवन में साथ चला। बहुत इम्पोर्टेंट है कि बच्चों को पैदा होने पर माता पिता क्या फाउंडेशन देते हैं। मेडिकल कॉलेज माता-पिता के बराबर है, गुरुओं के बराबर है। जहां से आगे जाने के लिए ज्ञान दिया, पेशेन्ट सबसे ज्यादा इम्पोर्टेंट, टेक्नोलॉजी के अलावा पेशन बहुत जरूरी है।
जवाब : वर्ष 1972 में अमरीका चला गया, जहां से ट्रेनिंग की सर्जरी की। कार्डियो थौरेसिक सर्जरी कनाडा में ब्रिटिश कोलम्बिया में की। फिर टेक्सास चला गया। हम ट्रेंड हो गए। पहले हार्ट सर्जरी की जाती थी वह छाती खोलकर, हार्ट मशीन पर डालकर व हार्ट स्टॉप करके सर्जरी करते थे। जब ग्रेजुएट करके टेक्सॉस गया, वर्ष 1995 में मिनीमली इनेवेजली सर्जरी शुरू हो रही थी, जब स्टेरलम कटता है तो रिकवरी बहुत लम्बी व रिकवरी ज्यादा लम्बी होती है। कॉम्प्लीकेशंस ज्यादा होता है। लेकिन मोटरलिटी रेट थी वह कम हो गई थी। लेकिन किसी ने रिकवरी पर कभी ध्यान नहीं दिया। मैंने सोचा कि ऐसी चीजें डवलप की जाए जिससे हार्ट सर्जरी की जाए ताकि पेशेन्ट की रिकवरी जल्दी हो।
जवाब : अमरीका 2000 में रोबोटिक सिस्टम एफडीआई से अप्रूव्ड हुआ। वर्ष 2002 में मैंने अस्पताल बनाने का प्लान बनाया। जिस शहर में थे वहां पॉपुलेशन भी कम थी। रोबोटिक सर्जरी के लिए चिकित्सकों के साथ मिलकर प्राइवेट अस्पताल बनाया। रोबोट खरीदा। मैंने 750 केसेज किए, इनमें से 20 प्रतिशत पेशेन्ट दूसरे दिन घर चले गए और 50 प्रतिशत मरीज दो दिन से भी कम समय में डिस्चार्ज होकर घर चले गए। यह फायदा हमने देखा। यूनिवर्सिटी शिकागो से निमंत्रण आया मैंने फैकल्टी ज्वॉइन की, फिर डायरेक्टर रहा रोबोटिक कार्डियक सर्जरी का। वहां प्रोग्राम लॉंच किया, वहां से अटलांटा गया।
जवाब : वर्ष 2002 में सबसे पहला केस भारत में किया। डॉ. नरेश त्रेहान मेरे अच्छे दोस्त हैं, उन्होंने बुलाया और तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम शुरुआत कर रहे थे। वहां मैंने रोबोटिक केस किया हिन्दुस्तान में पहली बार। हालांकि इसके बाद में व पहले भी सेवा के लिए हिन्दुस्तान आता जाता रहा।
जवाब : यह देश प्रेम, भाग्य की बात है। वर्ष 2012 में 22 साल की लेडी की कार्डियक सर्जरी करनी थी, उसके भाई ने चीरफाड़ की सर्जरी से कारणवश इंकार किया। जब 4 लाख की रोबोटिक सर्जरी के लिए बताया तो भाई के पास पैसे नहीं थे। भाई ने एक महीने बाद कॉल किया कि वह स्ट्रगल कर रहा है, पैसे नहीं है। मैंने प्राइवेट अस्पताल प्रबंधन को नि:शुल्क रोबोटिक सर्जरी का आग्रह किया लेकिन प्रबंधन नहीं माना। इस घटना ने झकझोर दिया। तब दु:ख हुआ कि पैसे की वजह से सबसे अच्छी केयर हम नहीं दे सकते हैं।
जवाब : मैंने इंजीनियर व चिकित्सकों की टीम के साथ शुरुआत की। अपनी सब जमा पूंजी लगा दी, दोस्तों से पैसे लेकर लगा दिए… यही नहीं अपना फर्नीचर, गाड़ी भी बेच दी। मेरी फेमिली वापस अमरीका चली गई। मैंने सात साल तक स्ट्रगल किया। बाद में मुझे फंडिंग मिली। मैं डिटरमिन था। सात साल फेस किया। अगर मैं नहीं करता तो यह कभी नहीं होता। जब मोनोपॉली थी किसी को इंटरेस्ट नहीं था। इसके बाद रोबोट बनाने से लेकर कंपनी खड़ी कर दी। अब विदेशों में नाम है।
जवाब : मैंने जेएलएन मेडिकल कॉलेज अजमेर में करियर शुरू किया, यहां दो रोबोट लगा दिए हैं। यहां के जो भी मरीज हैं, बाहर से भी आने वाले मरीज हैं, उन्हें रोबोटिक कार्डियक सर्जरी का लाभ मिलेगा। हम हर तरह से सहयोग करेंगे। अजमेर बहुत आगे बढ़े, हम तैयार हैं। अब छाती नहीं काटनी पड़ती है। मुझे गर्व होगा कि जहां से मेडिकल पढ़ाई शुरू की, वहां यह सौगात दे पाया। यह मुझे धन्यवाद देते हैं लेकिन मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को मैं धन्यवाद देता हूं कि मुझे यह सेवा करने का अवसर प्रदान किया।
जवाब : जन्मभूमि, मातृभूमि कभी नहीं भूलनी चाहिए, वहीं से शुरू होता है,. और जितना भी दे सके, जिस तरह से भी दे सकें, जितना दूर दे सकें, करना चाहिए। वरना हमेशा हम लोग लेते हैं .., अगर अच्छा आइडिया है, अगर सिंसीयर एफर्ट्स हैं तो कहीं ना कहीं से मदद आ जाएगी। हमेशा यही प्रार्थना करता था कि मुझे कुछ नहीं चाहिए।मुझे विश्वास नहीं कि कैसे, कहां से प्रोजेक्ट बन गया, कैसे लोग आए, कैसे सहयोग मिला कि देश की सेवा, मरीजों की सेवा कर सकें। ह्यूमेनिटी सबसे इंपोर्टेंट है।
मुझे बहुत ही गर्व महसूस हो रहा हूं। में भी यहीं पढ़ा हूं, प्रिंसीपल बना हूं। मातृभूमि की सेवा से बढ़कर कुछ नहीं। हमें यहां से जननी को वापस लौटाना है। डॉ. श्रीवास्तव सर ने अमरीका से लौटकर भारत को बहुत कुछ दिया। सीखा और अपनी जनसेवा को जारी रखा है। हमारे रोबोट एसएस, मंत्रा रोबोट अल्ट्रा एडवांस, मॉडल व मिनीमल इन्वेजिव सर्जरी के लायक है, चीरे कम और दर्द कम होगा, रिकवरी फास्ट होगी। मैं कृतज्ञ रहूंगा, मुझे गर्व महसूस हो रहा है। अजमेर मेडिकल कॉलेज से निकले स्टूडेंट डॉ. सुधीर श्रीवास्तव रोबोट डोनेट करने जा रहे हैं। सस्ती चीजें उपलब्ध कराना इनका सपना है, ताकि मरीजों को फायदा मिल सके।
डॉ. अनिल सामरिया, प्राचार्य जेएलएन मेडिकल कॉलेज अजमेर
Published on:
16 Jun 2026 12:31 pm
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