मेरे लिए चुनौतियां थोड़ी सी ज्यादा हैं, लेकिन मैं उन्हें करूंगी, थोड़ा समय लगेगा, मेहनत करेंगे और आपका सहयोग है तो सब हो जाएगा। यह शब्द हैं... 22 वर्षीय नन्दिनी गौड़ के, जिसके दोनों हाथ-पांव काम नहीं करते। वह पूरी तरह माता-पिता पर आश्रित हैं।
चन्द्र प्रकाश जोशी/ अजमेर। मां… मैं कुछ करना चाहती हैं, कुछ बनना चाहती हूं। मैं अपना कॅरियर इसलिए चाहती हूं कि मैं आत्मनिर्भर बनना चाहती हूं। मैं यह नहीं चाहती कि आगे जाकर यह कहूं कि मेरे पास दिमाग था, काबिलियत थी सिर्फ इसलिए सपनों को मारा क्योंकि में डिफरेंटली एबल्ड हूं, डिसेबल नहीं। मेरे लिए चुनौतियां थोड़ी सी ज्यादा हैं, लेकिन मैं उन्हें करूंगी, थोड़ा समय लगेगा, मेहनत करेंगे और आपका सहयोग है तो सब हो जाएगा। यह शब्द हैं… 22 वर्षीय नन्दिनी गौड़ के, जिसके दोनों हाथ-पांव काम नहीं करते। वह पूरी तरह माता-पिता पर आश्रित हैं।
ओपन स्कूल से स्कूली शिक्षा के बाद निजी कॉलेज से बीए द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रही हैं। घर पर अकेले बैठने की बजाय उसने चित्रकला के माध्यम से कॅरियर बनाने की ठान ली। पिछले दो साल से ड्रॉइंग, कैनवास पर चित्रकारी एवं पोर्ट्रेट बना रही हैं। हाथ से पेंसिल-ब्रश तक नहीं पकड़ने वाली नन्दिनी का जज्बा देख लोग आश्चर्यचकित रह जाते हैं। वह मुंह से पेंसिल व ब्रश को पकड़कर कई कलाकृति बना रही हैं।
नन्दिनी बताती हैं कि वह इन्टरनेट से सीखती हूं। मेरा कोई गुरु नहीं है ना ही बचपन में ड्रॉइंग सीखी है। चित्रकार व मांडणा कलाकार संजय सेठी की सलाह पर उसने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मन की बात एपिसोड के 100 एपिसोड पूरे होने पर एक कलाकृति बनाई जिसे सांसद भागीरथ चौधरी ने ट्वीट किया और प्रधानमंत्री ने भी री-ट्वीट किया।
दीपक में राममंदिर व भगवान राम की फोटो, प्रधानमंत्री की फोटो, एक प्लेट पर कालबेनियन डांसर का फोटो, मिनिएचर आर्ट बनाया। साउथ इंडियन डांसर का मिनिएचर आर्ट बनाया। योग दिवस पर योग की आठ मुद्रा बनाई हैं।
छोटी थी जब ग्रीटिंग कार्ड बनाती थीं.., इसके बाद पापा के फोटो का कोलाज बनाया, दीपावली के दीपक पर पेन्टिंग बनाए। फिर कुछ लगा कि मैं इसमें कॅरियर बना सकती हूं। इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा।
किसान कॉलोनी वैशालीनगर निवासी पिता प्रकाश गौड़ इवेन्ट का कार्य करते हैं। मां सीमा शर्मा गृहिणी हैं और बहन कृतिका पीएचडी कर रही हैं। तीनों नन्दिनी की हौसला अफजाई करती हैं। बाहर या घर में भी इधर-उधर जाना है तो व्हील चेयर का सहारा लेती हैं।
भविष्य में मैं अपनी कलाकृतियों की एक्जीबिशन लगाऊं। मेरे जैसे डिसेबल या डिफरेंट एबल्ड वाले युवक-युवतियों का एक क्लब या एनजीओ बनाकर उनके लिए काम करूं ताकि मेरे जैसे कई लोग हैं जो अपनी शारीरिक स्थिति से निराश या हताश होकर बैठे हैं उन्हें नई राह दिखाऊं, उनके साथ मिलकर काम करूं।