राजभवन ने दिए थे विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को निर्देश। अजमेर के इस विश्वविद्यालय में ना कोर्स बने ना शुरू हुए एडमिशन
रक्तिम तिवारी/अजमेर.
राजभवन के आदेशों को महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय ज्यादा तवज्जो नहीं देता है। विश्वविद्यालय ने कुलाधिपति द्वारा सुझाए गए कोर्स को भुला दिया है। इनके पाठ्यक्रम बनाने के प्रयास भी नहीं किए गए हैं। यह कोर्स शुरू होते तो निश्चित तौर पर विद्यार्थियों को फायदा मिल सकता था।
राज्यपाल प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति हैं। उनकी अध्यक्षता में प्रतिवर्ष कुलपति समन्वय समिति की बैठक होती है। इनमें कुलपतियों से शैक्षिक स्थिति, उच्च शिक्षा में नामांकन, विभागवार शिक्षक, शोध और नवीन पाठ्यक्रमों पर चर्चा होती है। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के कई कुलपति इन बैठक में शामिल हुए हैं। कुलाधिपति ने विद्यार्थियों के लिए रोजगारोन्मुखी कोर्स शुरुआत करने की बात कही थी। दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हो पाया है।
शुरू होने हैं यह कोर्स
आर्कियोलॉजी, फोर्ट आर्किटेक्चर, हिस्ट्री ऑफ बैटल्स, टूरिज्म एन्ड हॉस्पिटिलिटी, माइनिंग एन्ड जियोलॉजी, वाटर साइंस, इंटरनेशनल रिलेशन, लॉ ऑफ बॉर्डर, गांधियन फिलॉसॉफी, ह्मूमन राइट्स, सोशल वर्क, डिप्लोमा इन क्रिमनोलॉजी, फाइनेंशियल कंट्रोल एन्ड मार्केटिंग मैनेजमेंट
कुलपति बदले, कोर्स अटके
विश्वविद्यालय में दो स्थाई और दो अस्थाई कुलपति बदल गए। लेकिन राजभवन द्वारा सुझाए कोर्स प्रारंभ नहीं हो पाए। हालांकि विश्वविद्यालय ने एकेडेमिक कौंसिल की बैठक में कुलपतियों को इनके कोर्स बनाने के लिए अधिकृत किया भी किया, पर बात आगे नहीं बढ़ सकी। यह कोर्स सामाजिक विज्ञान, विज्ञान, विधि और प्रबंध अध्ययन संकाय से जुड़े हैं।
विद्यार्थी पढ़ रहे पारम्परिक कोर्स
विश्वविद्यालय परिसर में विद्यार्थी कुछेक पाठ्यक्रम को छोडकऱ बरसों से पारम्परिक कोर्स पढ़ रहे हैं। इनमें कॉमर्स, कम्प्यूटर साइंस, इतिहास, बीएड, राजनीति विज्ञान, एमबीए, प्योर एन्ड एप्लाइड केमिस्ट्री, पर्यावरण अध्ययन जूलॉजी, बॉटनी, जनसंख्या अध्ययन, फूड एन्ड न्यूट्रिशियन शामिल हैं। रिमोट सेंसिंग, उद्यमिता में एमबीए, सर्टिफिकेट इन बर्डिंग, सोशल वर्क जैसे कुछेक कोर्स ही नवाचार की श्रेणी में शामिल हैं।
वरना बढ़ते विवि में दाखिले
राजभवन के सुझाए कोर्स प्रारंभ होने पर कई फायदे होते। एक तरफ विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के दाखिले बढ़ते। दूसरी ओर नई फेकल्टी और फीस के रूप में फायदा होता। लेकिन विश्वविद्यालय ने फायदे के सौदे को कागजों में दफन करना ज्यादा मुनासिब समझा।
यह योजनाएं भी भूला प्रशासन...
-परिसर में विद्यार्थियों के लिए एफ.एम रेडियो
-सभी विभागों में स्मार्ट क्लासरूम
-रिमोट सेंसिंग तकनीक से ई-लेक्चर की व्यवस्था
-विभागों में विद्यार्थियों की सीट बढ़ोतरी
-दूसरे विश्वविद्यालयों से शैक्षिक आदान-प्रदान