
आयुर्वेद औषधालयों ने अभी भी शायद आमजन का विश्वास नहीं जीता है। मरीजों का एलौपैथिक दवा पर भरोसा बना हुआ है। आयुर्वेदिक औषधियों की गुणवत्ता एवं जड़ से रोग खत्म करने की क्षमता के बावजूद इसके प्रति बेरुखी कहीं न कही आयुर्वेद विभाग की लचर व्यवस्था की पोल खोल रही है।
शहर में कई स्थानों पर आयुर्वेद चिकित्सालय/ औषधालय संचालित हो रहे हैं। लेकिन वहां पर नाममात्र के लोग उपचार के लिए पहुंचते हैं। हालत यह है कि औषधालयों में संधारित रजिस्टर में मरीजों की एंट्री प्रतिदिन 30-35 के करीब बताई जा रही है।
लेकिन हकीकत इसके उलट है। राजस्थान पत्रिका की टीम ने सोमवार को शहर के तीन चिकित्सालयों की स्थिति देखी तो सिर्फ एक चिकित्सालय में एक रोगी जांच कराता मिला। उक्त चिकित्सालय में चिकित्सक के रिक्त पद के चलते कम्पाउंडर ही रोगी की जांच कर दवाइयां दे रहा था।
केस 1 : समय सुबह 10.17
प्रकाश रोड नागबाई राजकीय आयुर्वेदिक औषधालय में पिछले 8 माह से चिकित्सक के सेवानिवृत्त होने एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के वीआरएस लेने के कारण पद रिक्त चल रहा है। वर्तमान में एक कम्पाउंडर व एक नर्स कार्यरत है। वहां पर प्रतिदिन 30-35 मरीज प्रतिदिन आते हैं। कम्पाउंडर वीरसिंह चौहान एक रोगी की जांच करते मिले। चिकित्सालय में औषधियां भी पर्याप्त मात्रा में बताई जा रही है।
केस 2 : सुबह 10.45 बजे
क्षेत्रपाल चिकित्सालय के पीछे स्थित विद्यावती राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय में कार्यरत चिकित्सक का साप्ताहिक अवकाश होने के कारण कम्पाउंडर गिरीराज किशोर उपाध्याय अकेले बैठे थे। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन 15-20 मरीज आते हैं, लेकिन चिकित्सक के साप्ताहिक अवकाश के चलते अभी तक मात्र 5 रोगी ही आए हैं। अधिकांश मरीज मौसमी बीमारी के आते हैं।
केस 3 : सुबह 11.01 बजे
रामनगर स्थित राजकीय आयुर्वेद सीमावर्ती चिकित्सालय में दो चिकित्सक, दो कम्पाउंडर एवं एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी कार्यरत है। चिकित्सालय में डॉ. रेखा पारीक बैठी हुई थीं, जबकि दूसरी चिकित्सक का साप्ताहिक अवकाश था। चिकित्सालय में अन्य कार्यरत स्टाफ अपना काम निपटा रहा था। रजिस्टर में मात्र 6 मरीज की एंट्री थी। जबकि उनका कहना था प्रतिदिन 30 से 40 रोगी चिकित्सालय में आते हैं।
राज्य सरकार ने प्रतिनियुक्ति पर रोक लगा रखी है, इसके कारण रिक्त पदों पर चिकित्सक नहीं लग पा रहे हैं। जहां तक रोगियों की संख्या घटने की बात है इसके लिए आमजन को जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा।
- बी. एल. शर्मा, जिला आयुर्वेद चिकित्सालय अजमेर