लोगों को एसी से ही कुछ राहत मिल रही है। मानसून सक्रिय होने तक मौसम का रुख ऐसा ही बने रहने के आसार हैं।
अजमेर
लू के थपेड़ों और तीखी धूप से कोई राहत नहीं मिल रही है। शुक्रवार को भी धूप ने जमकर सताया। गर्मी का असर कायम है। इससे लोगों के पंखे और कूलर में भी पसीने छूटते रहे। अधिकतम तापमान 43.3 के बीच बना हुआ है।
बुधवार को धूल-धूसरित और छिटपुट बादलों से घिरा था। गुरुवार की तरह शुक्रवार को भी सूरज को तमतमाने का मौका मिल गया। सुबह से धूप में तीखापन महसूस हुआ। गर्म हवाओं के थपेड़ों ने लोगों को जमकर सताया।
रात को भी नहीं राहत
जून में तमतमाते सूरज के कारण रात को भी राहत नहीं मिल रही। रात का तापमान 5 से 8 डिग्री तक बढ़ा हुआ है। इसके चलते पंखे और कूलर फेल हो रहे हैं। लोगों को एसी से ही कुछ राहत मिल रही है। मानसून सक्रिय होने तक मौसम का रुख ऐसा ही बने रहने के आसार हैं।
समय पर आएगा मानसून.....
केरल कर्नाटक सहित अन्य प्रदेशों में दक्षिण पश्चिम मानसून पहुंच चुका है। कई जगह मानसून पूर्व बरसात हुई है। इसकी रफ्तार ठीक रही तो यह जून के अंतिम सप्ताह तक राजस्थान पहुंच जाएगा। अजमेर सहित पूरे राज्य में मानसून जुलाई से सितम्बर तक सक्रिय रहता है। इस दौरान होने वाली बरसात से बांधों और तालाबों में पानी की आवक होती है। इससे साल भर पेयजल और सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होता है।
पारा 24 दिन से 40 के पार
पारा बीते 24 दिन से 40 डिग्री से नीचे नहीं उतरा है। बीती 14 मई को बरसात और अंधड़ के चलते पारा लुढ़कर 32.2 डिग्री पर पहुंचा था। इसके बाद सूरज ने पारे को नीचे नहीं उतरने दिया। धूप की तपन और लू के झौंके शरीर को कचोटते रहे। अलबत्ता पारे का 19 मई 2016 का 46.2 का रिकॉर्ड इस साल भी नहीं टूट पाया।
कई बार धूल-धूसरित हुआ शहर
बीते मई और जून की शुरुआत में शहर कई बार धूल धूसरित हो चुका है। बीती 30 मई को अलवर और जयपुर में हुई बरसात के बाद शाम को अचानक मौसम बदला था। अजमेर में तेज हवाओं संग धूल भरी आंधी आई। करीब 20 मिनट तक शहर धूल-धूसरित रहा था। हवा चलने से लोगों को गर्मी से मामूली राहत मिली। इससे पहले 21 मई तेज हवाओं संग बरसात हुई। इसके बाद 6 जून को धूल ही धूल छाई रही।