मकर संक्रान्ति पर इस बार 28 साल बाद दुर्लभ महायोग बन रहा है। मकर संक्रान्ति के दिन 14 जनवरी को सूर्य देव अपने पुत्र शनि के घर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। पिता-पुत्र का मिलन होगा, जो दो माह तक रहेगा। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही सूर्य दक्षिणायण से उत्तरायण हो जाएंगे। इसके चलते मलमास की समाप्ति हो जाएगी। इससे विवाह जैसे शुभ, मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे।
करीब 28 साल के बाद मकर संक्रान्ति पर सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग के साथ चंद्रमा कर्क राशि में और अश्लेषा नक्षत्र व प्रीति तथा मानस योग रहेगा। यह योग दुर्लभ और श्रेष्ठ है। संक्रान्ति पर 12 राशियों के जातकों को दस गुना फलदायी होगा।
सूर्य का मकर राशि में प्रवेश
ज्योतिषाचार्य पंडित गौरव शास्त्री ने बताया कि वैसे तो यह प्रतिवर्ष 14 जनवरी को मनाया जाता है। लेकिन किसी वर्ष यह त्यौहार बारह, तेरह या पंद्रह को भी हो सकता है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि सूर्य कब धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करता है। इस दिन से सूर्य की उत्तरायण गति आरंभ होती है और इसी कारण इसको उत्तरायणी भी कहते हैं। इसी वजह से वर्ष 2016 में मकर संक्रांति 14 के बजाय 15 जनवरी को थी।
ज्योतिषाचार्य पंडित गौरव शास्त्री ।
2019-2020 में 15 जनवरी को मनाई जाएगी
गौरव शास्त्री के अनुसार मकर राशि में प्रवेश करने के कारण यह पर्व मकर संक्रांति देवदान पर्व के नाम से जाना जाता है। मकर संक्रांति मनाए जाने का यह क्रम हर दो साल के अंतराल में बदलता रहता है। लीप ईयर वर्ष आने के कारण मकर संक्रांति 2017-2018, 2021 में वापस 14 जनवरी को साल 2019-2020 में 15 जनवरी को मनाई जाएगी। यह क्रम 2030 तक चलेगा। इसके बाद तीन साल 15 जनवरी को एक साल 14 जनवरी को संक्रांति मनाई जाएगी।
1700 साल पहले 22 दिसम्बर को थी मकर संक्रांति
ऐसा होने का कारण हैं, पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमते हुए प्रतिवर्ष 55 विकला या 72 से 90 सालों में एक अंश पीछे रह जाती है। इससे सूर्य मकर राशि में एक दिन देरी से प्रवेश करता है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार करीब 1700 साल पहले 22 दिसम्बर को मकर संक्रांति मनायी जाती थी। इसके बाद पृथ्वी के घूमने की गति के चलते यह धीरे-धीरे दिसम्बर के बजाय जनवरी में गई है। मकर संक्रांति का समय हर 80 से 100 साल में एक आगे बढ़ जाता है। 19वीं शताब्दी में कई बार मकर संक्रांति 13 और 14 जनवरी को मनाई जाती थी। पिछले तीन साल से लगातार संक्रांति का पुण्यकाल 15 जनवरी को मनाया जा रहा है। इस वर्ष मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जाएगी जिसका पुण्य काल प्रातः 07:38 मिनट से प्रारम्भ हो जायेगा जो कि पूरे दिन रहेगा।
दान-पुण्य से चेतनता एवं कार्य शक्ति में होगी वृद्धि
शास्त्री जी ने आगे बताया कि इस दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि की राशि में प्रवेश करेंगे तथा दो माह तक रहते हैं। शनि देव चूंकि मकर राशि के स्वामी हैं, अत इस दिन को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। मकर संक्रांति को तमिलनाडु में पोंगल के नाम से जाना जाता है। इसी दिन मलमास एवं दक्षिणायन के समाप्त होने तथा शुभ माह एवं उत्तरायण के प्रारंभ होने के कारण लोग दान-पुण्य से अच्छी शुरुआत करते हैं। दक्षिणायण को देवताओं की रात्रि अर्थात नकारात्मकता का प्रतीक तथा उत्तरायण को देवताओं का दिन अर्थात सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। इसीलिए इस दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध, तर्पण आदि धार्मिक क्रियाकलापों का विशेष महत्व है। ऐसी धारणा है कि इस अवसर पर दिया गया दान सौ गुना बढ़कर पुन: प्राप्त होता है। इस दिन शुद्ध घी एवं कम्बल का दान मोक्ष की प्राप्ति करवाता है। मकर संक्रान्ति के अवसर पर गंगा स्नान एवं गंगातट पर दान को अत्यन्त शुभ माना गया है। इस पर्व पर तीर्थराज प्रयाग एवं गंगासागर में स्नान को महास्नान की संज्ञा दी गई है। मकर संक्रान्ति से सूर्य उत्तरी गोलार्ध की ओर आना शुरू हो जाता है। मकर संक्रान्ति पर सूर्य की राशि में हुए परिवर्तन को अंधकार से प्रकाश की ओर अग्रसर होना माना जाता है। प्रकाश अधिक होने से प्राणियों की चेतनता एवं कार्य शक्ति में वृद्धि होगी।