
Allahabad High Court Lawyers Protest: इलाहाबाद हाईकोर्ट में बुधवार को जस्टिस अजय भनोट की अदालत में वकीलों का प्रदर्शन हिंसक हो गया। गुस्साए अधिवक्ताओं ने कोर्ट रूम नंबर 49 में कुर्सियां और फर्नीचर जज के आसन की तरफ फेंके। जज बाल-बाल बच गए क्योंकि वे इससे पहले आसन छोड़कर चले गए थे।
मंगलवार को हुई एक घटना को लेकर विवाद बढ़ा। जस्टिस भनोट की अदालत में पुलिस अधीक्षक (एसपी) के लिए अगली पंक्ति में अलग कुर्सी रखी गई थी। एक वकील ने एसपी से पीछे बैठने को कहा। सरकारी अधिवक्ता ने इसकी शिकायत जज से की। आरोप है कि जज ने वकील को कड़ी फटकार लगाई, जेल भेजने की धमकी दी और एसपी से माफी मांगने को कहा। वरिष्ठ अधिवक्ता बीपी श्रीवास्तव का भी मजाक उड़ाने का आरोप लगाया गया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की और जस्टिस भनोट की अदालत के बहिष्कार की धमकी दी। एसोसिएशन ने कहा कि वकीलों की गरिमा का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बुधवार को जब जज कोर्ट में पहुंचे तो वकीलों ने नारेबाजी शुरू कर दी। विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया। गुस्साए अधिवक्ताओं ने डायस की तरफ कुर्सियां और अन्य फर्नीचर फेंके। कोर्टरूम में अफरातफरी मच गई। कुछ रिपोर्टों में जूता फेंके जाने का भी जिक्र है, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई। जज सुरक्षा में बाहर निकल गए। परिसर के बाहर भी नारेबाजी हुई।
न्यायमूर्ति अजय भनोट इलाहाबाद उच्च न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश हैं और वर्तमान में गौतम बुद्ध नगर जिले के प्रशासनिक न्यायाधीश के रूप में कार्यरत हैं। 4 अगस्त 1969 को जन्मे न्यायमूर्ति भनोट ने 1994 में लखनऊ विश्वविद्यालय से कानून (लॉ) की पढ़ाई पूरी की और 15 जनवरी 1995 को एक अधिवक्ता के रूप में पंजीकृत हुए। उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में सिविल, संवैधानिक, कर (टैक्स), सेवा, कंपनी कानून, आपराधिक मामलों के साथ-साथ पर्यावरण और औद्योगिक विवादों में व्यापक वकालत की। अपने लंबे करियर में उन्होंने भारत सरकार के वकील, उत्तर प्रदेश सरकार के स्थायी व अतिरिक्त सरकारी अधिवक्ता और यूपी लोक सेवा आयोग (UPPSC) के वकील के रूप में भी महत्वपूर्ण सेवाएँ दी हैं। उनके उत्कृष्ट कानूनी अनुभव को देखते हुए 23 मई 2015 को उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता नामित किया गया था। इसके बाद, 22 सितंबर 2017 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में उनकी नियुक्ति हुई और 6 सितंबर 2019 को उन्होंने स्थायी न्यायाधीश पद की शपथ ली। उनका सेवानिवृत्ति का समय 3 अगस्त 2031 निर्धारित है।