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2.5 साल जेल में बिताने के बाद मिली राहत! CM योगी पर अपमानजनक ईमेल भेजने के आरोपी मुबारक अली को जमानत

Allahabad High Court: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ कथित आपत्तिजनक ईमेल भेजने के आरोप में 2.5 साल से जेल में बंद मुबारक अली को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धीमी ट्रायल गति को देखते हुए जमानत दे दी है।
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प्रयागराज

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Shaitan Prajapat

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Updated: 18 Sep 2026, 8:30 PM IST

Allahabad High court

इलाहाबाद हाईकोर्ट (फोटो आईएएनएस)

Allahabad High Court Bail Mubarak Ali: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ आपत्तिजनक ईमेल भेजने के आरोप में करीब ढाई साल से जेल में बंद मुबारक अली को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत दे दी है। जस्टिस कृष्ण पहल की बेंच ने उसके जमानत आवेदन को मंजूर करते हुए रिहाई का आदेश दिया।

क्या है मामला?

मुबारक अली पर आरोप है कि उन्होंने 2024 में एक ईमेल भेजा था जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां की गई थीं। कथित तौर पर उन्होंने यह ईमेल अपनी एक अन्य केस में समझौता कराने के उद्देश्य से भेजा था। पुलिस ने उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 153ए, 295ए, 505(2), 504, 419, 420, 467, 468, 471, 120बी और आईटी एक्ट की धारा 66 के तहत गिरफ्तार किया था। वे 20 मार्च 2024 से जेल में बंद थे।

कोर्ट में क्या दलीलें दी गईं?

मुबारक अली के वकील ने अदालत में तर्क दिया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। उनका आपराधिक इतिहास में केवल एक ही मामला है। वकील ने बताया कि ट्रायल बेहद धीमी गति से चल रहा है। राज्य सरकार ने जमानत का विरोध किया था।
हाईकोर्ट ने पहले ट्रायल की स्थिति मांगी थी। जुलाई 2026 तक केवल 4 गवाहों के बयान दर्ज हो पाए थे, जबकि चार्जशीट के अनुसार अभी 26 गवाहों की गवाही बाकी थी। अदालत ने कहा कि अगर जमानत का मामला अन्यथा बनता है तो सिर्फ आपराधिक इतिहास के आधार पर आरोपी को जेल में नहीं रखा जा सकता।

जमानत देते हुए कोर्ट की टिप्पणी

बेंच ने कहा कि मुबारक अली का आपराधिक इतिहास संतोषजनक रूप से समझाया गया है। जेल में बिताई गई अवधि और ट्रायल की धीमी रफ्तार को देखते हुए अदालत ने गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त किए बिना जमानत मंजूर कर ली।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि मुबारक अली व्यक्तिगत बॉन्ड और समान राशि के दो जमानतदार पेश करने के बाद रिहा किए जाएं। उन्हें सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करने, गवाहों को प्रभावित नहीं करने और ट्रायल कोर्ट में नियमित रूप से पेश होने के निर्देश दिए गए। शर्तों का उल्लंघन होने पर जमानत रद्द की जा सकती है। अदालत ने साफ किया कि जमानत देते समय की गई टिप्पणियां ट्रायल को प्रभावित नहीं करेंगी।