अलवर

परिषद क्षेत्र में 35 सीएनजी ऑटो टिपर ने शुरू किया कचरा संग्रहण

भिवाड़ी. आवासीय क्षेत्र में घर-घर कचरा संग्रहण के लिए नगर परिषद ने 35 ऑटो टिपर खरीदे हैं। खरीदने के बाद सभी ऑटो टिपर का संचालन एक मार्च से शुरू हो चुका है। ऑटो टिपर की खास बात यह है कि इस बार डीजल, पेट्रोल नहीं बल्कि सीएनजी से संचालित हो रहे हैं, जिसकी वजह से […]

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Mar 05, 2026

भिवाड़ी. आवासीय क्षेत्र में घर-घर कचरा संग्रहण के लिए नगर परिषद ने 35 ऑटो टिपर खरीदे हैं। खरीदने के बाद सभी ऑटो टिपर का संचालन एक मार्च से शुरू हो चुका है। ऑटो टिपर की खास बात यह है कि इस बार डीजल, पेट्रोल नहीं बल्कि सीएनजी से संचालित हो रहे हैं, जिसकी वजह से ऑटो टिपर के संचालन से वायु प्रदूषण नहीं फैलेगा। परिषद को सीपीसीबी ने जो फंड दिया था, उससे टिपर खरीदे गए हैं। एक टिपर की कीमत करीब छह लाख रुपए है। टिपर में कचरा संग्रहण की क्षमता 1.8 क्यूबिक मीटर है। नए टिपर आने के बाद अब नगर परिषद के पास 60 टिपर हो गए हैं, परिषद के पास पहले से 25 टिपर थे। नए टिपर के संचालन का टेंडर भी किया है। टेंडर एक साल का, ठेकेदार की ओर से चालक, हेल्पर और ओएंडएम किया जाएगा। अजमेर की फर्म सोलिड वेस्ट संस्थान ने टेंडर लिया है। टेंडर इस शर्त पर दिया है कि एकीकृत सफाई व्यवस्था होने पर सेवाओं को समाप्त कर दिया जाएगा।
आयोग ने दिया था फंड: एनसीआर क्षेत्र में दो हजार सीसी से अधिक क्षमता के वाहनों पर एक प्रतिशत पर्यावरण सेस लगता है। इस सेस की राशि सीपीसीबी के पास पर्यावरण सुरक्षा कोष में जमा होती है। इस राशि का उपयोग वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए जरूरी संसाधन खरीदने में किया जाता है। भिवाड़ी भी एनसीआर में आता है और केंद्रीय वायु गुणवत्ता आयोग की ओर से लगाए जाने वाले ग्रेप को झेलता है लेकिन यहां संसाधनों की काफी कमी है। वायु गुणवत्ता को सुधारने के लिए रोड स्वीङ्क्षपग मशीन, एंटी स्मोग गन और पौधारोपण ही कारगर हथियार हैं।
आयोग कर रहा तैयारी: वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने साफ सफाई, रोड पर धूल नियंत्रण, पीएम 2.5 और पीएम 10 को रोकने के लिए दिल्ली एनसीआर के सभी शहरों को शामिल करते हुए गाइङ्क्षडग डॉक्यूमेंट (टूल किट) तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की है। हवा की सेहत को सुधारने के लिए बेहतर सफाई जरूरी है। अच्छी सफाई के लिए तकनीकी सलाह जरूरी है। टूल किट को क्लीन एयर एशिया का भारतीय कार्यालय तैयार करेगा। गाइङ्क्षडग डॉक्यूमेंट ग्लोबल बेस्ट प्रैक्टिस और स्थानीय जरूरतों को देखते हुए तैयार किया जाएगा।

Published on:
05 Mar 2026 11:56 pm
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