अलवर

Alwar: नालों में बहाया जा रहा केमिकल युक्त पानी, हंस सरोवर तक पहुंच रहा दूषित पानी

अलवर शहर में केमिकल युक्त पानी के निस्तारण को लेकर गंभीर लापरवाही के आरोप सामने आए हैं। हनुमान सर्किल के पास डंपिंग यार्ड क्षेत्र में रोजाना टैंकरों से केमिकलयुक्त और गंदा पानी नाले में खाली किए जाने की शिकायत है। इससे नाले में झाग बन रहा है और दूषित पानी हंस सरोवर की ओर पहुंच रहा है।
2 min read
Aug 19, 2026
chemical water drained
केमिकल युक्त पानी को नाले में खाली करते हुए (फोटो - पत्रिका)

अलवर शहर में केमिकल युक्त पानी के निस्तारण को लेकर लापरवाही का मामला सामने आया है। हनुमान सर्किल के पास डंपिंग यार्ड क्षेत्र में रोजाना टैंकरों से केमिकल युक्त पानी नाले में बहाए जाने की शिकायतें मिल रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यहां गंदगी से भरे टैंकर भी खाली किए जा रहे हैं। नाले में केमिकल युक्त पानी डालते ही झाग बनने लगता है। इससे आसपास के क्षेत्र में प्रदूषण फैलने के साथ लोगों के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता बढ़ रही है।

हंस सरोवर की ओर जा रहा केमिकल युक्त पानी

स्थानीय लोगों के अनुसार, टैंकरों से पानी नाले में डालने का सिलसिला नियमित रूप से चल रहा है। केमिकल युक्त पानी खुले नाले में पहुंचने के बाद आगे बहता हुआ अलवर के हंस सरोवर की ओर जा रहा है। ऐसे में दूषित पानी के जल स्रोत तक पहुंचने से उसके प्रदूषित होने की आशंका जताई जा रही है। इसका असर आसपास के पर्यावरण और भूजल पर भी पड़ सकता है।

लोगों का कहना है कि केमिकल युक्त पानी खुले में छोड़ने के बजाय उसका उचित तरीके से उपचार और निस्तारण किया जाना चाहिए। इसके लिए संबंधित कंपनियों और संस्थानों में ट्रीटमेंट प्लांट की व्यवस्था होना जरूरी है। इसके बावजूद शहर और एमआईए क्षेत्र की कई कंपनियों में केमिकल युक्त पानी के उपचार और निस्तारण की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने की बात सामने आ रही है।

भूजल और वातावरण पर भी असर

आरोप है कि कुछ कंपनियों से निकलने वाले अपशिष्ट को टैंकरों में भरकर रात के समय नालों में डाल दिया जाता है। एमआईए क्षेत्र में भी रात के समय नालों में गंदा पानी छोड़े जाने की शिकायतें स्थानीय स्तर पर सामने आती रही हैं। इससे क्षेत्र में प्रदूषण का खतरा बढ़ रहा है। खुले नाले में केमिकलयुक्त पानी डालने से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ भूजल और वातावरण पर भी असर पड़ सकता है।


ऐसे में लोगों ने प्रदूषण नियंत्रण विभाग से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि विभाग को मौके पर पहुंचकर टैंकरों की जांच करनी चाहिए और यह पता लगाना चाहिए कि पानी कहां से लाया जा रहा है। इसके साथ ही एमआईए और शहर की संबंधित कंपनियों में ट्रीटमेंट प्लांट की स्थिति की भी जांच की जानी चाहिए। शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। मामले में प्रदूषण नियंत्रण विभाग के आरओ से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन पर बात नहीं हो सकी।

Updated on:
19 Aug 2026 12:21 pm
Published on:
19 Aug 2026 12:21 pm