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Alwar: स्मार्ट मीटर से बिजली चोरी पर नजर, रात में ज्यादा खपत वाले घरेलू कनेक्शन रडार पर

बिजली चोरी रोकने के लिए स्मार्ट मीटर अब डिस्कॉम के लिए अहम हथियार बन रहे हैं। अलवर जिले में करीब 2 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। इनसे मिलने वाले खपत डेटा के आधार पर बिजली चोरी और लाइन लॉस वाले इलाकों की पहचान की जाएगी। रात की असामान्य खपत भी जांच के दायरे में रहेगी।
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smart meter

representative picture (AI)

स्मार्ट मीटर के जरिए जयपुर डिस्कॉम बिजली चोरी करने वाले उपभोक्ताओं पर नजर रख रखा है। कई जगहों से इन मीटर्स के जरिए बिजली चोरी की सूचनाएं भी मिल रही हैं। ऐसे में विभाग बिजली चोरी करने वाले उपभोक्ताओं पर भारी जुर्माना लगने की तैयारी में है।

स्मार्ट मीटर से मिलने वाला हर खपत डेटा निगम के लिए बिजली चोरी का संकेत बनेगा। किस कनेक्शन पर कब और कितनी बिजली खर्च हो रही है, इसके पैटर्न का तकनीकी विश्लेषण कर संदिग्ध कनेक्शनों को चिन्हित किया जाएगा। खासकर घरेलू कनेक्शनों में रात के समय होने वाली ज्यादा खपत पर नजर रखी जाएगी। अलवर जिले में करीब 2 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं।

बिजली खपत का पूरा आकलन

स्मार्ट मीटर के जरिए केवल एक उपभोक्ता की खपत ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की बिजली खपत का आकलन किया जा सकेगा। किसी ट्रांसफॉर्मर से निकलने वाली कुल बिजली और उससे जुड़े उपभोक्ताओं के मीटर में दर्ज खपत का मिलान किया जाएगा। दोनों आंकड़ों में बड़ा अंतर सामने आने पर उस क्षेत्र में बिजली चोरी या लाइन लॉस की संभावना तलाशने के लिए जांच की जाएगी। सामान्य पैटर्न से हटकर रात में लगातार ज्यादा खपत दर्ज होने पर डेटा के आधार पर उसे संदिग्ध मानकर निगम की टीम मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति की जांच कर सकती है।

अचानक बदली खपत तो भी निगरानी

व्यावसायिक कनेक्शनों पर भी स्मार्ट मीटर के जरिए नजर रखी जाएगी। किसी इलाके में बिजली की खपत अचानक बढ़ने या घटने पर निगम डेटा के आधार पर इसकी वजह तलाश सकेगा। इससे संभावित बिजली चोरी वाले क्षेत्रों की पहचान के साथ लाइन लॉस वाले इलाकों को चिन्हित करने में भी मदद मिलेगी।


डेटा से तय होगी बिजली की रणनीति

स्मार्ट मीटर से मिलने वाले आंकड़े सिर्फ बिजली चोरी पकड़ने तक सीमित नहीं रहेंगे। इनसे यह भी पता चलेगा कि किस क्षेत्र में किस समय बिजली की मांग सबसे ज्यादा रहती है। इसके आधार पर लोड प्रबंधन, बिजली आपूर्ति की योजना और भविष्य में नेटवर्क को मजबूत करने के फैसले लिए जा सकेंगे। यानी अब मीटर की रीडिंग ही नहीं, उसकी पूरी कहानी निगम के रडार पर होगी।

उपभोक्ता अपनी बिजली खपत का प्रत्येक घंटे का रिकॉर्ड देख सकते हैं। घर बैठे बिजली का बिल मिल जाएगा। बिजली निगम के पास मीटर का पूरा एनालिसिस (विश्लेषण) होगा। कनेक्शन काटने के लिए मौके पर जाने की कोई आवश्यकता नहीं होगी। मीटर को कार्यालय से लॉक कर दिया जाएगा - जेपी बैरवा, एसई, बिजली निगम अलवर