यूआईटी में नियमों को दरकिरनार कर अधिकारियों और कर्मचारियों को लॉटरी में निकाले गए 47 भूखंडों का मुद्दा बुधवार को विधानसभा में गूंजा। शहर विधायक संजय शर्मा ने विधानसभा में अलवर यूआईटी की ओर से रियायती दरों पर आवंटित भूखंडों का मुद्दा उठा पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की स्वायत्त शासन मंत्री से मांग की।
अलवर. यूआईटी में नियमों को दरकिरनार कर अधिकारियों और कर्मचारियों को लॉटरी में निकाले गए 47 भूखंडों का मुद्दा बुधवार को विधानसभा में गूंजा। शहर विधायक संजय शर्मा ने विधानसभा में अलवर यूआईटी की ओर से रियायती दरों पर आवंटित भूखंडों का मुद्दा उठा पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की स्वायत्त शासन मंत्री से मांग की।
शहर विधायक शर्मा ने राजस्थान विधानसभा की प्रक्रिया नियम 131 के तहत अलवर यूआईटी की ओर से रियायती दरों पर आवंटित भूखंडों की निष्पक्ष जांच कराने के लिए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से मुद्दा उठाते हुए बताया कि अलवर यूआईटी की ओर से वर्ष 2012 और 2016 में सरकार को न्यास कर्मचारियों को रियायती दर पर भूखंड दिए जाने के लिए प्रस्ताव भेजा। इसके बाद वर्तमान सरकार ने 4 जनवरी 2021 को पुराने आदेशों को विलोपित कर नया नोटिफिकेशन जारी कर भू आवंटन नियमों में रियायती दर पर आवंटन हटाकर, इसके स्थान पर फिक्स दर पर आवंटन का प्रावधान किया और सिर्फ 10 प्रतिशत भूखंड राज्य कर्मचारी व सभी स्थानीय निकायों के कर्मचारियों के लिए आरक्षित करने का प्रावधान किया।
यूआईटी ने नियमों को ताक पर रख दिए प्लॉट
विधानसभा में शहर विधायक ने कहा कि अलवर यूआईटी ने पिछले दिनों अधिकारियों एवं कर्मचारियों को नए नियमों को ताक पर रखकर पुराने नियमों की स्वीकृति के आधार पर ही गुपचुप तरीके से लॉटरी से भूखंड आवंटन कर दिए। उन्होंने यूआईटी पर गलत तरीके से भूखंड देने का संगीन आरोप लगाया। उन्होंने स्वायत्त शासन मंत्री से जानना चाहा कि यूआईटी अलवर की ओर से सरकार के जनवरी 2021 के नियम होते हुए भी पुरानी स्वीकृति को आधार क्यों बनाया गया? यह जांच का विषय है।
मंत्री यूआईटी में भूखंड लॉटरी प्रकरण की कराएं जांच
विधायक शर्मा ने कहा कि रियायती दरों पर भूखंडों का आवंटन सामान्य तौर पर यूआईटी की प्रस्तावित कालोनियों में किया जाता है। इसके लिए पहले से भूखंडों को रिजर्व रखा जाता है। उन्होंने नगरीय विकास एवं आवासन मंत्री से अलवर यूआईटी की ओर से आवंटित भूखंडों की निष्पक्ष रूप से जांच कराने तथा नियमानुसार कार्रवाई का आग्रह किया।
भूखंडों की बंदरबाट का मुद्दा पत्रिका ने उठाया
यूआईटी की ओर से अधिकारियों एवं कर्मचारियों को लॉटरी में भूखंडों की बंदरबाट का मामला राजस्थान पत्रिका ने प्रमुखता से उठाया था। पत्रिका में प्रकाशित समाचार में यूआईटी में अधिकारियों व कर्मचारियों को नियमों को दरकिरनार कर 47 भूखंड निकालने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। लॉटरी में अलवर शहर की विकसित प्रमुख आवासीय योजनाओं में भूखंड की लॉटरी निकालने पर सवालिया निशान लगाया था।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने मांगी प्रकरण की रिपोर्ट
यूआईटी में अधिकारियों एवं कर्मचारियों को नियमों को ताक पर रख लॉटरी निकालने का समाचार प्रकाशित होने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने प्रकरण की रिपोर्ट मांग ली। इस पर प्रशासन ने मशक्कत कर पूरे प्रकरण की रिपोर्ट तैयार कर पिछले दिनों ही राज्य सरकार को भेजी है। वहीं श्रम राज्य मंत्री टीकाराम जूली ने भी इस प्रकरण की रिपोर्ट मांगी है।
अब भूखंड निरस्ती की कार्रवाई का इंतजार
यूआईटी में लॉटरी से अधिकारियों एवं कर्मचारियों को दिए गए भूखंडों के अब निरस्त करने की कार्रवाई का इंतजार है। राज्य सरकार को रिपोर्ट भेजने के बाद जल्द कार्रवाई की संभावना है। भूखंडों की निरस्ती की कार्रवाई राज्य सरकार या यूआईटी ट्रस्ट स्तर पर होनी है।