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शादी से पहले और प्रेग्नेंसी में एक जांच बचा सकती है आपके बच्चे की जान, जानिए थैलेसीमिया से जुड़ी हर जरूरी बात

विश्व थैलेसीमिया दिवस पर यह समझना जरूरी है कि यह एक आनुवंशिक बीमारी है, जो माता-पिता से बच्चों में फैलती है। देश में हर साल 15 हजार बच्चे इसके साथ जन्म लेते हैं। मात्र एक सही समय पर की गई जांच से इस गंभीर खतरे को टाला जा सकता है।

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representative picture (AI)

आज विश्व थैलेसीमिया दिवस है। रक्त से जुड़ी यह असाध्य बीमारी है और देश में हर वर्ष करीब 15 हजार बच्चे थैलेसीमिया मेजर से ग्रसित जन्म लेते हैं। इससे पीड़ित बच्चों के रक्त में हीमोग्लोबिन और लाल रक्त कोशिकाओं (आरबीसी) की मात्रा कम हो जाती है, जिससे एनीमिया की स्थिति बनती है। यह मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है माइनर और मेजर। माइनर थैलेसीमिया सामान्य रूप से गंभीर नहीं माना जाता, जबकि मेजर थैलेसीमिया अधिक जटिल होता है। मेजर के भी अल्फा और बीटा प्रकार होते हैं।

माता-पिता से बच्चों में पहुंचती है बीमारी

थैलेसीमिया पूरी तरह जेनेटिक बीमारी है। यदि माता या पिता में से किसी एक को थैलेसीमिया है तो बच्चे में माइनर थैलेसीमिया होने की आशंका रहती है। यदि दोनों माता-पिता थैलेसीमिया से प्रभावित हों तो 25 प्रतिशत बच्चों में मेजर थैलेसीमिया होने की संभावना रहती है। ऐसे मामलों में 25 प्रतिशत बच्चे सामान्य तथा 50 प्रतिशत बच्चों में माइनर थैलेसीमिया होने की आशंका रहती है। गर्भावस्था के 10 से 12 सप्ताह के बीच भ्रूण की क्रोनिक विलस सैंपलिंग (सीवीएस) जांच कराई जाती है। यह जांच भ्रूण में जेनेटिक विकारों का पता लगाने के लिए की जाती है।

बच्चों में दिखते हैं ये लक्षण

थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों के शरीर में धीरे-धीरे पीलापन बढ़ने लगता है। बच्चे चिड़चिड़े हो जाते हैं, भूख कम लगती है और स्तनपान भी घट जाता है। इसका असर वजन बढ़ने पर पड़ता है। ऐसे बच्चों का पेट सामान्य बच्चों की तुलना में अधिक बढ़ा हुआ दिखाई देता है। इसकी पहचान के लिए हीमोग्लोबिन इलेक्ट्रोफोरेसिस टेस्ट तथा हाई परफॉर्मेंस लिक्विड क्रोमैटोग्राफी जांच कराई जाती है।

बोन मैरो ट्रांसप्लांट है स्थायी उपचार

दक्ष वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष अनिल कुमार ने बताया कि थैलेसीमिया से पीड़ित मरीजों में लाल रक्त कोशिकाओं की मात्रा बनाए रखने के लिए नियमित रक्त चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है। इसका स्थायी इलाज बोन मैरो ट्रांसप्लांट माना जाता है। इसके लिए एचएलए यानी जीन का मिलान आवश्यक होता है। भाई-बहन और माता-पिता को आदर्श डोनर माना जाता है। अब 50 प्रतिशत जीन मैच होने पर भी बोन मैरो ट्रांसप्लांट संभव हो गया है।

भ्रांतियां और सच्चाई

भ्रांति : थैलेसीमिया मरीजों को खून मिलना मुश्किल होता है
सच्चाई- यह पूरी तरह गलत धारणा है। मरीजों को रक्त आसानी से उपलब्ध हो जाता है। संक्रमण से बचाव के लिए रक्त चढ़ाते समय ल्यूकोसाइट फिल्टर का उपयोग करना चाहिए।
भ्रांति : थैलेसीमिया पॉजिटिव व्यक्ति शादी नहीं कर सकते
सच्चाई- थैलेसीमिया पॉजिटिव व्यक्ति विवाह कर सकते हैं। केवल गर्भधारण के बाद 10 से 12 सप्ताह के भीतर सीवीएस जांच कराना जरूरी होता है, ताकि समय रहते उचित चिकित्सकीय निर्णय लिया जा सके।