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सिलीसेढ़ बनेगा इको-टूरिज्म और प्राकृतिक सौंदर्य का नया केंद्र

सिलीसेढ़ क्षेत्र के प्राकृतिक सौंदर्य पर अब चार चांद लगाए जाएंगे। इस दिशा में कई विभाग मिलक काम करेंगे। सबसे ज्यादा फोकस अतिक्रमण हटाने पर रहेगा। ताकि यहां ज्यादा से ज्यादा पक्षी प्रवास कर सकें। जिला प्रशासन ने झील का स्वरूप निखारने के लिए करीब 11.18 करोड़ रुपए का प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेजा है।

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अलवर

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Umesh Sharma

May 08, 2026

प्रसिद्ध सिलीसेढ़ क्षेत्र वेटलैंड घोषित होने के बाद अब नए स्वरूप में नजर आएगा। यहां पर्यावरण संरक्षण के साथ पर्यटन और प्राकृतिक विकास को बढ़ावा देने के लिए व्यापक योजना तैयार की गई है। प्रशासन ने करीब 11.18 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का प्रस्ताव सरकार को भेज दिया है। मंजूरी मिलते ही विभिन्न विभागों की ओर से काम शुरू करवाए जाएंगे। साथ ही, झील के चारों ओर से अतिक्रमण भी हटाया जाएगा। इस पर भी काम शुरू हो गया है। पहले भी यूआइटी की ओर से यहां बिना भू-रूपांतरण के चल रहे होटल व रिजॉर्ट को सील किया जा चुका है।
सिलीसेढ़ के विकास के लिए यूआइटी, वन विभाग, कृषि विभाग, उद्यान विभाग, पर्यटन विभाग, भूजल विभाग, मत्स्य विभाग और जल संसाधन विभाग ने अपने-अपने प्रस्ताव तैयार किए हैं। इन योजनाओं के तहत क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, पर्यटन सुविधाओं के विस्तार और प्राकृतिक आवासों के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। प्रशासन का मानना है कि वेटलैंड के रूप में विकसित होने के बाद सिलीसेढ़ न केवल पर्यावरण संरक्षण का बड़ा केंद्र बनेगा, बल्कि पर्यटन और स्थानीय रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा। इससे क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता और आकर्षण में भी बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। प्रशासन ने यहां के विकास के लिए पांच साल की योजना तैयार की है।
पक्षियों की संख्या में होगा इजाफा
एक्सपर्ट के मुताबिक इस विकास प्रस्ताव से पक्षियों की संख्या में इजाफा होगा। इससे नमी एरिया का विस्तार होगा। उन्हें आवास बनाने में आसानी होगी। इसके अलावा मगरमच्छ, मछलियों की संख्या में भी इजाफा होने के आसार हैं। जल संरक्षण से जल स्तर ऊंचा होगा। झील के पास पार्क विकास भी हो सकेगा।
सिलीसेढ़ झील के विकास के लिए आठ विभागों ने 11.18 करोड़ के प्रस्ताव तैयार किए हैं, जिसे मंजूरी के लिए सरकार को भेज दिया गया है। जैसे ही वहां से मंजूरी मिलेगी, कार्य शुरू हो जाएगा।-संजय खत्री, अधीक्षण अभियंता, जल संसाधन विभाग