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अलवर में मासूम से दरिंदगी करने वाले को 20 साल की जेल

अलवर की पोक्सो अदालत ने 16 साल से कम उम्र की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म करने वाले आरोपी को कड़ी सजा सुनाई है। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अपराधी को 20 साल के कठोर कारावास की सजा और जुर्माने से दंडित किया है। जज ने स्पष्ट किया कि मासूमों के साथ होने वाले ऐसे अपराधों में नरमी की कोई जगह नहीं है।

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अलवर में मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म करने वाले आरोपी को कड़ी सजा सुनाई है। यह शर्मनाक घटना 11 फरवरी 2025 की है। विशिष्ट लोक अभियोजक पंकज यादव ने बताया कि पीड़िता के दादा ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी 16 साल से कम उम्र की पोती घर से बाहर गई थी, तभी पड़ोस में रहने वाला आरोपी उसे अगवा कर जंगल में ले गया।

जब बच्ची काफी देर तक घर नहीं लौटी, तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। काफी ढूंढने के बाद वह जंगल में बेहद डरी सहमी और अर्धनग्न हालत में मिली। घर लाकर जब उसे संभाला गया और प्यार से पूछा गया, तो उसने अपनी आपबीती सुनाई। बच्ची ने बताया कि आरोपी ने उसके साथ जबरदस्ती की और शोर मचाने या किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी भी दी।

पुलिस की जांच और कोर्ट में पेश किए सबूत

मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच अधिकारी ने तत्परता से तफ्तीश की और आरोपी के खिलाफ अदालत में चार्जशीट पेश की। कोर्ट में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मजबूती से अपना पक्ष रखा। इस दौरान 13 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए और 17 अहम दस्तावेजी सबूत पेश किए गए। इन सबूतों ने आरोपी के गुनाह को पूरी तरह साबित कर दिया।

कोर्ट ने ठुकराई नरमी की अपील

सुनवाई के आखिरी दौर में आरोपी के वकील ने कोर्ट से गुहार लगाई कि आरोपी की सजा में थोड़ी नरमी बरती जाए और उसे कम सजा दी जाए। हालांकि, सरकारी वकील पंकज यादव ने इसका पुरजोर विरोध किया।

विशिष्ठ न्यायालय पोक्सो नंबर 2 के न्यायाधीश जगेंद्र अग्रवाल ने सजा सुनाते समय कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आरोपी ने एक मासूम के साथ जो दरिंदगी की है, उसका बुरा असर बच्ची के मन और दिमाग पर हमेशा रहेगा। ऐसे गंभीर अपराध में सजा कम करने से समाज में गलत संदेश जाएगा।

सजा और आर्थिक दंड

न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 20 साल के कठोर कारावास (सख्त जेल) की सजा सुनाई। साथ ही उस पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। इसके अलावा, अदालत ने पीड़िता की मदद के लिए 'प्रतिकर योजना' के तहत 3 लाख रुपये का मुआवजा दिलाने की सिफारिश जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अलवर को भेजी है। इस फैसले के बाद स्थानीय लोगों ने न्यायपालिका के प्रति भरोसा जताया है।