
राजस्थान पत्रिका की पड़ताल (फोटो - पत्रिका)
अलवर में स्वच्छ सर्वेक्षण का फीडबैक लेने के लिए नगर निगम कार्यालय परिसर समेत शहर में 6 स्थानों पर बूथ बनाए गए हैं। फीडबैक लेने में फर्जीवाड़ा हो रहा है। नगर निगम की टीम लोगों से ओटीपी पूछकर सभी 13 सवालों के जवाब खुद भर रही है। इसका खुलासा राजस्थान पत्रिका की दो दिन की पड़ताल में हुआ है।
पत्रिका की टीम मंगलवार को नगर निगम कार्यालय में लगे बूथ पर पहुंची, तो यहां दो महिला कार्मिक मिलीं। फीडबैक के लिए उन्होंने रिपोर्टर से पहले मोबाइल नंबर मांगा और फिर ओटीपी। इसके बाद महिला कर्मचारी ने सभी सवालों के ऑब्जेक्टिव आंसर खुद भर दिए और कहा कि आप जाइए, फीडबैक भर गया। रिपोर्टर ने कहा कि आपने मेरा फीडबैक तो लिया ही नहीं? इस सवाल का कोई संतोषजनक जवाब महिला कर्मियों के पास नहीं था।
इसके बाद बुधवार को फिर से पत्रिका टीम इसी बूथ पर पहुंची। एक कार्मिक ने मोबाइल नंबर व ओटीपी लिया और सवालों के जवाब खुद भर दिए। विरोध करने पर कहा कि नगर निगम की तरफ से क्या क्या अच्छे काम करवाए जा रहे हैं, इसकी जानकारी आपको नहीं है, इसलिए फीडबैक हम खुद भर देंगे।
स्कीम नंबर चार निवासी खेमचंद किसी अन्य काम से नगर निगम कार्यालय पहुंचे। महिला कार्मिक ने उन्हें बूथ पर बुलाया और स्वच्छ सर्वेक्षण के लिए फीडबैक देने को कहा। खेमचंद ने अपना मोबाइल नंबर बताया। जब उनसे ओटीपी पूछा गया, तो उन्होंने विरोध करते हुए कहा कि ओपीटी से फर्जीवाड़े होते हैं, मैं बता सकता। हालांकि बूथ पर तैनात महिला कार्मिक उन्हें समझाने में सफल हो गई। ओटीपी भरने के बाद सवालों के जवाब महिला कार्मिक ने ही भर दिए। इस पर खेमचंद ने कहा कि फीडबैक तो मुझसे लेना चाहिए था। इसके बाद खेमचंद ने महिला कार्मिक का अपना मोबाइल फोन ले लिया।
स्वच्छ सर्वेक्षण में फीडबैक के 500 अंक नगर निगम को मिलने हैं। डीएलबी के आदेश पर नगर निगम ने अपने परिसर के अलावा बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, सामान्य अस्पताल, कंपनी गार्डन व पुराना सूचना केंद्र में कैनोपी लगाई हैं और दो दो कर्मचारियों की फीडबैक लेने के लिए तैनाती की है। कैनोपी पर क्यूआर कोड लगाए गए हैं। जनता सीधे स्कैन करके फीडबैक दे सकती है, लेकिन नगर निगम व अन्य जगहों पर काम के लिए पहुंचे लोगों के पास समय का अभाव है।
ऐसे में निगम के कर्मचारी ही उन्हें बुलाकर फीडबैक ले रहे हैं। इसके लिए मोबाइल नंबर दर्ज किया जाता है और फिर संबंधित मोबाइल पर ओटीपी आता है, जो सिस्टम पर फीड करने के बाद 13 सवाल खुल जाते हैं। उन सवालों के जवाब जनता से निगम कर्मियों को लेने चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा।
स्वच्छ सर्वेक्षण के लिए केन्द्रीय टीम कभी भी अलवर आ सकती है। ऐसे में फीडबैक के फर्जीवाड़े से रैंकिंग पर असर आ सकता है। सर्वेक्षण टीम खुद भी फीडबैक लेती है। नगर निगम के एक कार्मिक ने बताया कि प्रतिदिन 200 लोगों के फीडबैक लिए जा रहे हैं।
छह जगहों पर बूथ लगाकर जनता से फीडबैक कार्मिक ले रहे हैं। फीडबैक के फर्जीवाड़े को लेकर अभी तक कोई शिकायत भी नहीं आई है। जनता खुद भी सीधे क्यूआर कोड स्कैन करके फीडबैक दे सकती है - राकेश कुमार मीणा, इंजीनियर, स्वच्छ भारत मिशन
Published on:
07 May 2026 12:15 pm
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