
शहरी सरकार में महिलाओं का दबदबा रहा है। चाहे नगर परिषद हो या नगर निगम लंबे समय तक कमान महिलाओं के हाथ में रही है। दिलचस्प संयोग यह रहा कि निगम में जिस पार्टी का बोर्ड बना, प्रदेश में सत्ता भी उसी पार्टी के हाथ में रही। वर्ष 1999 में कांग्रेस का बोर्ड बना और उस समय राजस्थान में कांग्रेस की सरकार थी। वर्ष 2004 में भाजपा का बोर्ड बना, तब प्रदेश में भाजपा की सरकार थी। वर्ष 2014 में भी भाजपा का बोर्ड बना और उस समय राजस्थान में भाजपा की सरकार थी।
वर्ष 2009 और 2019 में राजस्थान में कांग्रेस की सरकार थी, लेकिन अलवर नगर निकाय की कमान भाजपा के हाथ में रही। वर्ष 2009 में हर्षपाल कौर तत्कालीन नगर परिषद की सभापति बनीं। इसके बाद 2019 में कांग्रेस सरकार के समय भाजपा का बोर्ड बना, लेकिन क्रॉस वोटिंग की वजह से महापौर की कुर्सी पर कांग्रेस की बीना गुप्ता बैठीं। हालांकि इस पद भाजपा सरकार के आने से पहले ही भाजपा के उप सभापति घनश्याम गुर्जर महापौर बन चुके थे।
अब अलवर नगर निगम चुनाव में एक बार फिर निगम की कमान महिलाओं के हाथ में रहने वाली है। इस बार महापौर की सीट अनारक्षित महिला के खाते में जाएगी। ऐसे में यहां के राजनीतिक इतिहास में महिला नेतृत्व की परंपरा एक बार फिर आगे बढ़ने जा रही है। अब देखना होगा कि इस बार दोनों प्रमुख राजनीतिक दल किस महिला चेहरे पर दांव लगाते हैं और क्या नगर निगम का अगला बोर्ड भी प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी के साथ रहने का पुराना आंकड़ा कायम रखता है या फिर बदलता है।