स्कूली विद्यार्थियों में भी ई-सिगरेट का चलन तेजी से बढ़ा है। सख्ती के बावजूद चोरी-छिपे यह सिगरेट बिक रही है। पिछले दिनों ही अलवर शहर के एक स्कूल में करीब 40 विद्यार्थियों के बैग से यह सिगरेट बरामद हुई है।
स्कूली विद्यार्थियों में भी ई-सिगरेट का चलन तेजी से बढ़ा है। सख्ती के बावजूद चोरी-छिपे यह सिगरेट बिक रही है। पिछले दिनों ही अलवर शहर के एक स्कूल में करीब 40 विद्यार्थियों के बैग से यह सिगरेट बरामद हुई है। हालांकि आधिकारिक तौर पर कोई इसकी पुष्टि नहीं कर रहा है, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हुई इस खबर ने सभी को परेशान कर दिया है।
एक्सपर्ट की मानें तो ई-सिगरेट न केवल रखना आसान है, बल्कि इसका चोरी-छिपे प्रयोग किया जा सकता है। बीड़ी-सिगरेट धुआं छोड़ती हैं, जबकि ई सिगरेट से वेप निकलता है, जिससे किसी को पता नहीं चलता। इसे छिपाना आसान है, क्योंकि इसे पेन और पेन ड्राइव के शेप में बनाया जा रहा है, इसलिए बच्चों के हाथ में होते हुए भी किसी को शक नहीं होता। इसमें निकोटिन होता है, इसलिए दुर्गंध नहीं आती। विशेषज्ञों का कहना है कि इसका प्रयोग खतरनाक है। यह हार्ट, लंग्स को प्रभावित करता है। कैंसर का भी कारण बनता है।
ई-सिगरेट देश में बैन है। इसका किसी भी रूप में इस्तेमाल गैर कानूनी है। लेकिन कंपनियां इनकी बिक्री कर रही है। अलवर शहर में भी कई जगहों पर इसकी बिक्री हो रही है, लेकिन संबंधित विभाग इन पर कार्रवाई नहीं करते हैं। इन कंपनियों का लक्ष्य टीनेजर्स को लत लगाना है क्योंकि ये लंबे समय तक इनके यूजर बन जाते हैं।
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