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अलवर जंक्शन पर बनेगा वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, पटरियों पर नहीं भरेगा पानी; 111 करोड़ से बदलेगी तस्वीर

Alwar Railway Station Redevelopment: अलवर जंक्शन पर 111 करोड़ रुपए के पुनर्विकास कार्य होंगे। इस राशि के जरिए स्टेशन पर कई अत्याधुनिक सुविधाएं लोगों को उपलब्ध कराई जाएंगी।
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Updated: 18 May 2026, 12:34 PM IST
Alwar Railway Station Redevelopment
पुनर्विकास कार्य के बाद ऐसा दिखेगा अलवर जंक्शन। फोटो: पत्रिका

अलवर। अलवर जंक्शन पर 111 करोड़ रुपए के पुनर्विकास कार्य होंगे। इस राशि के जरिए स्टेशन पर कई अत्याधुनिक सुविधाएं लोगों को उपलब्ध कराई जाएंगी। रेल मंत्रालय की ओर से स्टेशन पर जो विकास का खाका तैयार किया गया है, उसमें वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का भी प्रावधान किया गया है। इसके तहत स्टेशन पर चार रिचार्ज पिट का निर्माण किया जाएगा। प्रत्येक की क्षमता 50 किलोलीटर यानी 50 हजार लीटर की होगी।

स्टेशन की छतों से निकलने वाली पानी को इस पिट से जोड़ा जाएगा, ताकि पानी को सीधे जमीन में पहुंचाया जा सके। पानी के बढ़ते संकट को कम करने के लिए रेल मंत्रालय ने देशभर के कई स्टेशनों पर इस सिस्टम का प्रावधान किया है। यही वजह है कि पुनर्विकास कार्यों के तहत अलवर रेलवे स्टेशन पर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाया जाएगा। इससे बारिश के दौरान रेलवे स्टेशन पर पानी भरने की समस्या से भी निजात मिलेगी।

हर साल बारिश के सीजन में रेलवे स्टेशन की पटरियों पर पानी भर जाता है। इससे रेल यातायात प्रभावित होता है। वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनने के बाद इस समस्या से निजात मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। गौरतलब है कि सीएम भजन लाल शर्मा, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने 15 मई को अलवर जंक्शन पर 111 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का शिलान्यास किया था। रेलवे की अगले 40 साल की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर यहां विकास कार्य कराए जाएंगे।

50 किलो लीटर का वाटर रीसाइक्लिंग प्लांट भी बनेगा

स्टेशन पर वाटर रीसाइक्लिग प्लांट भी बनाया जाएगा। पचास हजार लीटर के इस प्लांट में अपशिष्ट जल को उपचारित करके उसे ट्रेनों की धुलाई, प्लेटफॉर्म की सफाई और बागवानी में उपयोग किया जाएगा। इससे हजारों लीटर पीने की पानी की बचत होगी। गुजरात, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में इस तरह के प्लांट के जरिए लाखों लीटर पानी बचाया जा रहा है।

यूं बचेगा लाखों लीटर पानी

प्लेटफॉर्म और इमारतों की छतों से बारिश का पानी इकट्ठा करने के लिए किनारे पर स्लोप वाले गटर लगाए जाते हैं। इसके बाद पानी में मौजूद धूल, पत्ते और कचरे को हटाने के लिए जाली और चारकोल व कंक्रीट फिल्टर का उपयोग किया जाता है। साफ होने के बाद पानी को रिचार्ज पिट के जरिए सीधे जमीन में भेजा जाएगा।

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18 May 2026, 12:34 PM IST
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