अलवर

बा​घ-बाघिनों बाला किला मार्ग को हाईटेक मशीनों से सुधारेगा पीडब्ल्यूडी, पहले पहाड़ के फाॅल्ट की होगी जांच

बाला किला मार्ग की मरम्मत जल्द शुरू होने वाली है। पीडब्ल्यूडी इसके टेंडर करेगा। हालांकि काम शुरू होने से पहले हाईटेक मशीनों से पता लगाया जाएगा कि पहाड़ में कहां-कहां फॉल्ट लाइन है। इस आधार पर ही काम किया जाएगा ताकि भविष्य में कोई गड़बड़ी नहीं हो। वर्तमान में कट्टों के जरिए मरम्मत की गई है। बाला किला मार्ग पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यहां करणी माता मेला भी यहां भरता है।

2 min read
May 23, 2026
bala quila marg

करीब डेढ़ साल से बंद चल रहा बाला किला मार्ग की मरम्मत पीडब्ल्यूडी करवाने जा रहा है। इसके लिए टेंडर की तैयारी है। एक विदेशी कंपनी के पास हाईटेक मशीन हैं, जो यह पता लगाएगी कि पहाड़ में कहां-कहां फॉल्ट लाइन है, जिसे ठीक किया जा सकता है और उसके बाद समुचित मरम्मत करके इस मार्ग को चालू कर दिया जाएगा। वर्तमान में कट्टों के जरिए मरम्मत की गई है। इंजीनियरों का कहना है कि मशीन के जरिए यह भी पता लग जाएगा कि कट्टों का यह कार्य कितना मजबूत है और कितने दिन तक चल सकता है।

बाला किला मार्ग पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। साथ ही, करणी माता मेला भी यहां भरता है। ऐसे में साल में लाखों लोगों का जाना-आना रहता है। बारिश के मौसम में करीब डेढ़ साल पहले यह मार्ग जर्जर हो गया और रास्ता बंद कर दिया गया। सरिस्का की जिप्सियां रोक दी गई। आमजन को भी नहीं जाने दिया जा रहा।

पिछले साल पीडब्ल्यूडी ने करणी माता मेला नजदीक होने के कारण मार्ग की मिट्टी के कट्टों के जरिए मरम्मत करके चालू कर दिया। अब इस मार्ग को पक्का किया जाना है, जिसके लिए पीडब्ल्यूडी पहाड़ों में कार्य करने वाली कंपनियों का चयन करने की तैयारी है। कुछ कंपनियों के पास ही हाईटेक मशीनें हैं, जो पहाड़ों में कार्य करती हैं।


केवल नवरात्र में ही खोला गया

पिछले डेढ़ साल में इस मार्ग को केवल नवरात्र के समय ही खोला गया। उस दौरान भी चोपहिया वाहनों का प्रवेश बंद रखा गया। दुपहिया वाहनों से प्रवेश दिया गया। इसमें भी हेलमेट अनिवार्य किया गया था। लोगों को साफ चेतावनी दी गई थी कि मार्ग में सीधे चलें। इसके अलावा डीेजे, भंडारे पर रोक लगाई गई थी। रात के वक्त भी एंट्री बंद की गई थी। जैसे ही नवरात्र पूरे हुए अगले दिन ही रास्ता बंद कर दिया गया।

कई बा​घ-बाघिनों का डेरा


मार्ग बंद होने का सबसे ज्यादा फायदा वन्यजीवों को मिला है। यहां कई बाघ-बाघिनों ने अपना डेरा डाल रखा है। उन्हें स्वच्छंद विचरण के लिए रास्ता मिल गया है। शावक भी यहां खुलेआम घूम रहे हैं। यहां बा​घ-बाघिनों की टेरेटरी बनने के कारण अंधेरी व आसपास के क्षेत्रों में पर्यटकों को बा​घ-बाघिनों का दीदार हो रहा है।

ये भी पढ़ें

राजस्थान में अरावली की वादियों में दिखेगा अफ्रीका का सबसे ऊंचा वन्यजीव; सज्जनगढ़ पार्क में नया आकर्षण
Updated on:
23 May 2026 11:18 am
Published on:
23 May 2026 11:12 am
Also Read
View All