भिवाड़ी औद्योगिक क्षेत्र में भीषण आग के बाद हालात दिल दहला देने वाले थे। अग्निशमन अधिकारी ने बताया कि फैक्ट्री भट्टी की तरह तप रही थी और अंदर कई शव इस कदर जल चुके थे कि हड्डियां तक राख में बदल गईं।
Bhiwadi Factory Fire: देश की राजधानी दिल्ली से महज 80 किलोमीटर और भिवाड़ी से 15 किलोमीटर दूर खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में सोमवार सुबह अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट ने लापरवाही और अवैध कारोबार की भयावह सच्चाई उजागर कर दी। शटर बंद होने से अंदर काम कर रहे श्रमिक आग और जहरीले धुएं के बीच फंस गए।
बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं था। मदद की चीखें भी आग की लपटों में दब गईं और सात मजदूर जिंदा जल गए। चार गंभीर झुलसे मजदूरों को दिल्ली रेफर किया गया है। हादसे के बाद फैक्ट्री संचालक हेमंत शर्मा फरार हो गया।
भूखंड संख्या जी-1, 118, बी में बनी इस अवैध फैक्टरी में सुबह करीब 9:10 बजे 11 श्रमिक पटाखे तैयार कर रहे थे। तभी अचानक जोरदार विस्फोट हुआ और आग ने पूरे हॉल को चपेट में ले लिया। धमाका इतना तेज था कि चार से पांच किलोमीटर दूर तक आवाज सुनाई दी और इलाके में दहशत फैल गई।
घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें फैक्ट्री से धुएं का विशाल गुबार उठता दिख रहा है। सात दमकलों ने करीब 11:30 बजे तक आग पर काबू पाया। सूचना मिलते ही वन राज्यमंत्री संजय शर्मा और खैरथल-तिजारा जिले की प्रभारी कलेक्टर आर्तिका शुक्ला मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया।
जिस हॉल में पटाखा बनाए जा रहे थे, वहां अंदर-बाहर जाने के लिए शटर लगे थे और खिड़की पर भी कांच लगे थे। यहां काम गुपचुप तरीके से होता था। फैक्ट्री के अंदर घुसने और बाहर निकलने पर रोक थी। बंद फैक्ट्री होने के कारण आग लगने पर मजदूरों को बाहर निकलने का मौका भी नहीं मिला और कुछ ही मिनटों में लपटों ने उन्हें घेर लिया।
अग्निशमन अधिकारी नरेश मीणा ने बताया कि आग पर काबू पाने के बाद मैं प्रात: 11:30 बजे मैं फैक्ट्री में अंदर गया। वहां का दृश्य बेहद वीभत्स था। पूरी फैक्ट्री भट्टी की तरह तप रही थी। चारों तरफ जले हुए शवों के अवशेष और मांस के लोथड़े बिखरे पड़े थे।
अधिकारी ने बताया कि शरीर में कुछ नहीं बचा था। जैसे-तैसे जले हुए हिस्सों को कट्टों में भरा। कई मृतकों की हड्डियां भी राख हो चुकी थी। जैसे-तैसे खुद पर काबू पाकर साथियों के साथ राहत कार्य शुरू किया।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में पटाखों के उत्पादन, बिक्री और खरीद पर प्रतिबंध है। इसके बावजूद यह फैक्ट्री अवैध रूप से संचालित हो रही थी। फैक्ट्री खुशखेड़ा थाना से महज एक किलोमीटर दूरी पर स्थित थी। फैक्ट्री मालिक के पास कोई लाइसेंस नहीं था और घटना के बाद से वह फरार है। ऐसे में सीधे तौर पर फैक्ट्री संचालक और स्थानीय पुलिस-प्रशासन की मिलीभगत सामने आ रही है।