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भीषण धमाका…चीखें और धुएं का गुबार, भिवाड़ी अग्निकांड के पहले CCTV फुटेज ने सभी को दहलाया

Bhiwadi Factory Fire Update:राजस्थान की औद्योगिक नगरी भिवाड़ी से महज 15 किलोमीटर दूर खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में सोमवार सुबह करीब 9 बजकर 10 मिनट पर एक अवैध पटाखा फैक्टरी में भीषण आग लगने से 7 मजदूर जिंदा जल गए।
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अलवर

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kamlesh sharma

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Updated: 16 Feb 2026, 6:52 PM IST

Bhiwadi Factory Fire Update: फोटो पत्रिका नेटवर्क

भिवाड़ी। राजस्थान की औद्योगिक नगरी भिवाड़ी से महज 15 किलोमीटर दूर खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में सोमवार सुबह करीब 9 बजकर 10 मिनट पर एक अवैध पटाखा फैक्टरी में भीषण आग लगने से 7 मजदूर जिंदा जल गए। गंभीर रूप से झुलसे 4 मजदूरों को दिल्ली रेफर किया गया है। फैक्टरी संचालक फरार है।

भूखंड संख्या जी-1, 118, बी में बनी इस अवैध फैक्टरी में सुबह 11 श्रमिक पटाखे बना रहे थे। तभी अज्ञात कारणों से आग लग गई। हादसे का एक वीडियो भी सामने आया है। इसमें फैक्टरी में तेज धमाके बाद धुएं का गुबार उठता नजर आ रहा है।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आसपास के करीब पांच किमी क्षेत्र में धमाकों की आवाज सुनाई दी। सुबह 11 बजे तक आग पर काबू पा लिया गया। घटना की सूचना मिलने के बाद वन राज्यमंत्री संजय शर्मा तथा खैरथल-तिजारा जिले की प्रभारी कलक्टर डॉ. आर्तिका शुक्ला मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया।

इनकी हुई मौत

  • सुजानत पुत्र शिव पासवान निवासी मोतिहारी (बिहार)
  • मिंटू पुत्र सिकंदर पासवान निवासी मोतिहारी (बिहार)
  • अजीत पुत्र सुरेंद्र, निवासी मोतिहारी (बिहार)
  • रवि पुत्र राजदेव निवासी मोतिहारी (बिहार)
  • श्याम पुत्र जयदेव निवासी चंपारण (बिहार)
  • अमरेश पुत्र कृष्ण लाल निवासी चंपारण (बिहार)
  • शशि भूषण, इसकी पूरी जानकारी नहीं मिल पाई

एनसीआर में पटाखों के उत्पादन, बेचने व खरीदने पर है प्रतिबंध

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में पटाखों (आतिशबाजी) के उत्पादन, बिक्री व खरीदने पर प्रतिबंध है। इसके बावजूद यह अवैध पटाखा फैक्टरी संचालित थी। ऐसे में सीधे तौर पर फैक्टरी संचालक और स्थानीय पुलिस-प्रशासन की मिलीभगत सामने आ रही है।

अंदर ही फंसे रहे गए श्रमिक

फैक्टरी के जिस हॉल में पटाखा निर्माण हो रहा था, उसके अंदर-बाहर प्रवेश के लिए शटर लगा रखे थे। दीवार पर खिडक़ी थी, जिसमें कांच लगे हुए थे। शटर बंद थे, जिसकी वजह से श्रमिकों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला। फैक्टरी के अंदर क्या काम होता है, इसकी भनक किसी को नहीं लगे, इसलिए निर्माण कार्य को गुपचुप किया जाता था। फैक्टरी के अंदर घुसने और बाहर निकलने पर रोक थी। आग लगने पर मजदूरों को हॉल से बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिला।

अब तक की जांच में यह बात सामने आई कि बंद फैक्टरी में पटाखे बनाए जा रहे थे। यहां 20 से कम लोग काम करते हैं, इस कारण यह फैक्टरी एक्ट में कवर नहीं हो रही थी। सोमवार को यहां करीब 10 मजदूरों के काम करने की सूचना थी। इस मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार हो रही है। उसी के अनुसार आगे कार्रवाई करेंगे।

आर्तिका शुक्ला, प्रभारी जिला कलक्टर, खैरथल-तिजारा