Master plan violation: अलवर की स्कीम नंबर 10 बी में स्थित दीवान जी का बाग की करीब 9 बीघा जमीन पर जारी सभी 11 पट्टे निरस्त कर दिए गए हैं। जिला कलक्टर आर्तिका शुक्ला के आदेश पर एडीएम सिटी बीना महावर ने नगर निगम आयुक्त को इस संबंध में आदेश जारी किए थे।
Master plan violation: अलवर की स्कीम नंबर 10 बी में स्थित दीवान जी का बाग की करीब 9 बीघा जमीन पर जारी सभी 11 पट्टे निरस्त कर दिए गए हैं। जिला कलक्टर आर्तिका शुक्ला के आदेश पर एडीएम सिटी बीना महावर ने नगर निगम आयुक्त को इस संबंध में आदेश जारी किए थे।
यह मामला राजस्थान पत्रिका ने 24 फरवरी के अंक में प्रमुखता से उठाया था। पत्रिका ने सवाल उठाए थे कि मास्टर प्लान में जो जमीन ग्रीनबेल्ट के नाम दर्ज है, उसका भू-रूपांतरण कैसे हो सकता है। साथ ही पत्रिका ने नगर निगम की ओर से पट्टे जारी करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए थे। इसके बाद लगातार खबरें प्रकाशित की, तो यह मामला विधानसभा में भी उठा था।
दीवान जी का बाग की करीब 9 बीघा जमीन का भू-रूपांतरण नगर निगम ने नियम विरुद्ध किया था। मास्टर प्लान की ग्रीनबेल्ट को आवासीय में दर्शाकर पट्टे जारी कर दिए गए थे। पत्रिका के खुलासे के बाद प्रशासन ने पहले नगर निगम, यूआइटी व तहसील अलवर की रिपोर्ट मंगवाई और फिर संयुक्त जांच कराई, जिसमें भू-रूपांतरण से लेकर पट्टे जारी करने तक की प्रक्रिया को गलत ठहराया गया था।
इस रिपोर्ट में मास्टर प्लान में आरक्षित ग्रीनबेल्ट की जमीन को आवासीय में बदलने को जान-बूझकर किया गया कृत्य माना गया। वर्ष 2023 में नगर निगम के तत्कालीन कमिश्नर जोधाराम विश्नोई ने 6 विभागों की NOC लिए बिना ही इस पूरी जमीन का भू-रूपांतरण कर दिया था। उसके बाद पट्टे जारी हो गए। शहर के कई नामचीन लोगों ने इस जमीन पर पैसा लगाकर प्लॉटिंग शुरू कर दी थी।
राजस्थान पत्रिका ने जब पहली बार इस मामले का खुलासा किया, तब यह कहा गया कि मामला प्रभावशाली लोगों से जुड़ा है, इसलिए प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं करेगा। कुछ तथाकथित लोगों ने सच को झूठ साबित करने का प्रयास किया। राजस्थान पत्रिका पर खबरें प्रकाशित न करने का दबाव भी बनाया गया, लेकिन राजस्थान पत्रिका झुका नहीं।
राजस्थान पत्रिका की खबरों की गूंज विधानसभा में भी सुनाई दी। आखिरकार दवाव में आए प्रशासन ने जांच कराई, तो वो सारी बातें सच साबित हुई, जो राजस्थान पत्रिका की खबरों में शामिल थीं। लिहाजा, प्रशासन को एक्शन लेना पड़ा। कई मौका-परस्त लोगों के सपने अधूरे रह गए। कई लोगों की जीवनभर की जमा पूंजी डूबने से बच गई…. यह राजस्थान पत्रिका के लाखों पाठकों के भरोसे की जीत है।
नगर निगम ने पट्टे निरस्तीकरण की कार्रवाई के आदेश में कहा है कि दीवान जी का बाग प्रकरण में गुलाब कोठारी बनाम राजस्थान सरकार के आवेश का उल्लंघन हुआ है। मालम हो कि प्रदेश में मास्टर प्लान लागू करने में सरकार के अनियमितताएं बरतने, शहरों के सीनबेल्ट व पेरिफेरल जॉन सुरक्षित रखने के संबंध में पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी के पत्र पर राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रसंज्ञान लिया था।
इस पर करीबन 13 साल सुनवाई करने के बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 12 जनवरी 2017 को 35 दिशा निर्देश जारी किए थे। कहा गया था कि मास्टर प्लान शी सख्ती से पालना होनी चाहिए। उसमें कर्ज सीनबेल्ट का भू प्रयोग नहीं बदला जा सकता।
(ये सभी पट्टे दीवान जी के बाग के खसरा नंबर 1256, 1259, 1260 पर जारी हुए थे)
दीवान जी के बाग की जमीन पर जारी हुए सभी 11 पट्टे निरस्त कर दिए गए हैं। कोर्ट में भी हमने अपना पक्ष प्रमुखता से रख दिया है। आगे भी हम कार्रवाई करेंगे।