ऊंटों की तादाद बढ़ाने में जुटा पशुपालन विभाग, जिले में 1141 ऊंटों का किया पंजीयन अलवर. राजस्थान में उऊंट को रेगिस्तान का जहाज कहा जाता है। लेकिन ऊंटाें की आबादी कम होती जा रही है। इसको देखते हुए पशुपालन विभाग अलवर जिले में बचे हुए ऊंटों को बचाने के लिए बजट जारी किया है। सरकार ने उष्ट संरक्षण योजना के तहत वर्ष 2022 -23 का बजट जारी किया गया है।
विभाग की ओर से पहली किश्त के तौर 10 लाख 80 हजार का भुगतान किया है।इसमें 216 ऊंटों के लिए राशि दी गई है। जबकि 395 आवेदन शेष रह गए हैं। 150 आवेदन दस्तावेजों की कमी के चलते निरस्त कर दिए गए हैं। दूसरी किश्त में 110 का सत्यापन होना है जिसमें से अभी तक 74 का ही सत्यापन हो पाया है। सरकार की यह योजना साल 2014 में लागू हुई थी। पहली किश्त पूर्व में ही जारी हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने इसी साल दूसरी किश्त को भी मंजूरी दे दी है। जल्द ही यह राशि भी खाते में आ जाएगी।
दो किश्त में मिलते हैं दस हजारइस योजना के तहत सरकार ऊंट के संरक्षण व प्रजनन को प्रोत्साहन दे रही है। इसमें पशुपालक को दो किश्त में दस हजार रुपए दिए जाते हैं। इसमें टोडिया यानि उऊंट के बच्चे नर व मादा जिनकी उम्र 2 माह है इनके लिए पहली किश्त में पांच हजार रुपए दिए जाते हैं। एक साल का होने पर पांच हजार रुपए दूसरी किश्त के दिए जाते हैं।
विभाग में पंजीकृत है 1141 ऊंटपशु पालन विभाग के पास 1141 ऊंटों का रजिस्ट्रेशन है। इसमें से 611 ऊंटों का सत्यापन हो चुका है। शेष का दस्तावेज नहीं मिलने, सॉफ्टवेयर में गलत जानकारी देने सहित अन्य कारणों से सत्यापन नहीं हो पाया है। जिले में पशुपालको की संख्या 330 है इसमें से 187 पशुपालको का ही सत्यापन हुआ है। विभाग की ओर से 611 टोडिया का सत्यापन किया है।
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के बाद होता है भुगतानइस योजना का लाभ लेने के लिए पशुपालक काे ऊंट का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाना होता है। इसके बाद पशु चिकित्सक मौके पर जाकर सत्यापन करता है और ऊंट व छोटे बच्चे को टेग लगाकर उसकी फोटो ऑनलाइन अपलॉड करता है। इसके बाद पहली किश्त मिलती है। इस दौरान ऊंट सुरक्षित है उसे बेचा नहीं गया है तो दूसरी किश्त के लिए एक साल बाद फिर से सत्यापन होता है और इसके बाद पांच हजार रुपए दूसरी किश्त में मिलते हैं।
ऊंट संरक्षण को बढ़ावा देने और संख्या को बढ़ाने के लिए यह योजना चल रही है। वर्ष 2023-24 के लिए 150 पंजीयन हो चुका है। ज्यादातर पशुपालक बाहर चले गए हैं इसलिए सत्यापन नहीं हो पाया है। ऊंटपाल अलवर का निवासी हो, टोडिया की उम्र दो साल होनी जरुरी है।
डा. राजेश गुप्ता्, संयुक्त निदेशक, पशुपालन विभाग, अलवर।