अलवर

गोशाला में गो-सेवा और कॉलेज में पौधरोपण से दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

राजस्थान पत्रिका के संस्थापक श्रद्धेय कर्पूर चन्द्र कुलिश के जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में रविवार को शहर में कई सेवा कार्यों का आयोजन किया गया।

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Mar 22, 2026

राजस्थान पत्रिका के संस्थापक श्रद्धेय कर्पूर चन्द्र कुलिश के जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में रविवार को शहर में कई सेवा कार्यों का आयोजन किया गया। संयुक्त वैश्य महासभा बुद्ध विहार और विजयनगर इकाई की ओर से जहां गो-सेवा के जरिए अपनी श्रद्धा प्रकट की गई, वहीं राजकीय वाणिज्य महाविद्यालय में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।

गोशाला में गूंजे भजन, 400 गायों की हुई सेवा

बुद्ध विहार स्थित गोशाला में आयोजित 'गो सवामणी' कार्यक्रम में वैश्य समाज के लोग बड़ी संख्या में एकत्रित हुए। इस दौरान भक्तिमय भजनों की प्रस्तुति ने वातावरण को धर्ममय बना दिया। महासभा के सदस्यों ने करीब 400 गायों को अपने हाथों से चारा खिलाया। महासभा के अध्यक्ष सतीश गुप्ता ने कहा कि श्रद्धेय कुलिश जी का जीवन भारतीय मूल्यों और जीव-दया के प्रति समर्पित था, उन्हीं के आदर्शों पर चलते हुए आज यह गो-सेवा का प्रकल्प लिया गया है। इस अवसर पर अखिलेश गुप्ता, पीयूष गर्ग, वीके अग्रवाल, गिरीश गुप्ता, अनिल बंसल और केके अग्रवाल सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे।

राजकीय वाणिज्य महाविद्यालय में पौधरोपण

कुलिश जन्म शताब्दी वर्ष की कड़ी में दूसरा प्रमुख कार्यक्रम राजकीय वाणिज्य महाविद्यालय में आयोजित हुआ। यहाँ सभी ने मिलकर पौधरोपण किया। कार्यक्रम के दौरान सभी ने न केवल पौधे लगाने, बल्कि उनके संरक्षण की जिम्मेदारी लेने की शपथ भी ली।
शिक्षण संस्थान में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने वर्तमान वैश्विक चुनौतियों पर प्रकाश डाला। मुख्य बिंदुओं में शामिल था:
जलवायु परिवर्तन: शिक्षकों ने बताया कि बढ़ते प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग के कारण प्रकृति संकट में है, जिसका समाधान केवल हरियाली बढ़ाकर ही संभव है।
जल संरक्षण: सभी को पानी की एक-एक बूंद बचाने और जल स्रोतों को स्वच्छ रखने के लिए प्रेरित किया गया।
शिक्षा का महत्व: कुलिश जी के व्यक्तित्व का उदाहरण देते हुए बताया गया कि कैसे शिक्षा और ज्ञान के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।


सेवा और संकल्प का दिन

रविवार को हुए इन आयोजनों ने यह संदेश दिया कि श्रद्धेय कर्पूर चन्द्र कुलिश के विचार आज भी प्रासंगिक हैं। चाहे वह जीव-दया हो या प्रकृति का संवर्धन, समाज के हर वर्ग ने अपनी भागीदारी निभाकर उन्हें स्वरांजलि अर्पित की। काफी संख्या में लोगों ने उत्साहपूर्वक इस अभियान से जुड़कर भविष्य में पर्यावरण रक्षक बनने का संकल्प लिया।

Published on:
22 Mar 2026 01:02 pm
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