
dilapidated school
हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद अब जिले के हर सरकारी स्कूल भवन की तकनीकी सेफ्टी ऑडिट कराई जा रही है। इस बार केवल खानापूर्ति नहीं होगी, बल्कि सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के इंजीनियर मौके पर पहुंचकर भवनों की मजबूती जांचेंगे। जो भवन बच्चों के लिए खतरा साबित होंगे, उन पर तत्काल ताला लगाकर स्कूलों को शिफ्ट किया जाएगा। मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने सभी मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों (सीबीईओ) को टीम गठित करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। ग्रीष्मावकाश के दौरान ही पूरा सर्वे कराया जाएगा। इसके चलते संस्था प्रधान और पीईईओ को अवकाश के बावजूद स्कूलों में उपस्थित रहकर रिपोर्ट तैयार करनी होगी।
जांच के बाद घोषित होंगे असुरक्षित
पीडब्ल्यूडी के कनिष्ठ अभियंता और सहायक अभियंता भवनों की तकनीकी स्थिति का आकलन करेंगे। जांच में यह तय होगा कि कौन से भवन सुरक्षित हैं, किनकी मरम्मत जरूरी है और कौन पूरी तरह जर्जर होकर बच्चों के लिए खतरा बन चुके हैं। असुरक्षित घोषित भवनों को तुरंत खाली कराया जाएगा। वहां अध्ययनरत विद्यार्थियों को नजदीकी सुरक्षित स्कूलों या सामुदायिक भवनों में शिफ्ट किया जाएगा ताकि पढ़ाई प्रभावित न हो।
16 जून तक देनी होगी पूरी रिपोर्ट
शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों से 16 जून तक सेफ्टी ऑडिट रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट हार्ड कॉपी और सॉफ्ट कॉपी दोनों रूपों में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में जमा करनी होगी। जिला स्तर पर पूरी प्रक्रिया की मॉनिटरिंग होगी और लापरवाही मिलने पर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई भी तय मानी जा रही है।
पहले के सर्वे पर उठे थे सवाल
जिले में पहले हुए सर्वे पर सवाल उठे थे। कई स्कूलों में भवनों की वास्तविक स्थिति छिपाकर उन्हें सुरक्षित बताया गया था। जबकि वर्तमान स्थिति बेहद चिंताजनक है। जिले में अब तक 1492 सरकारी स्कूलों के 2214 कमरे जर्जर पाए गए हैं, वहीं 4789 कमरे मरम्मत योग्य स्थिति में हैं। झालावाड़ स्कूल हादसे के बाद प्रशासन पहले ही 44 जर्जर स्कूल भवन खाली करवा चुका है। वहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया। अब नए आदेशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन स्कूलों को पहले ही शिफ्ट किया जा चुका है, उनके मूल भवनों का भी अनिवार्य तकनीकी ऑडिट होगा।
Published on:
25 May 2026 11:14 am
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