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अलवर के लक्ष्मणगढ़ में श्वानों का आतंक, डॉग-बाइट के मामलों में लगातार हो रही बढ़ोतरी

राजस्थान में अलवर जिले के लक्ष्मणगढ़ उपखंड में श्वानों का आतंक बना हुआ है। क्षेत्र में डॉग-बाइट के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। हालात ये हैं कि श्वान के काटने से अस्पताल में औसतन प्रतिदिन 10 लोग उपचार को पहुंच रहे हैं। गांव हो या शहर। यहां की सड़कों, गलियों, चौक-चौराहों पर श्वानों के झूंड भौंकते हुए लोगों की ओर हमला करने को दौड़ते नजर आते हैं। इनके आतंक से लोगों में दशहत बनी हुई है।
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अलवर

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Ramkaran Katariya

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RAMKARAN KATARIYA

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May 25, 2026

ALWAR NEWS

श्वान के हमले में हाथ पर हुए जख्म।

अलवर. जिले के लक्ष्मणगढ़ कस्बे सहित ग्रामीण क्षेत्रों में श्वानों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। गलियों से लेकर मुख्य मार्गों तक झुंड में घूम रहे श्वान राहगीरों के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं। स्थिति यह है कि बच्चों और बुजुर्गों का घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है। आलम यह है कि क्षेत्र के मौजपुर और मूंडियाखेड़ा गांव में 23 व 24 मई को एक श्वान ने करीब 45 लोगों को काट कर जख्मी कर दिया। इससे पहले 21 मई को हरसाना में भी एक दर्जन से अधिक लोग घायल हुए थे। लगातार घटनाओं से ग्रामीणों में भय का माहौल है।

चिकित्सा सूत्रों के अनुसार लक्ष्मणगढ़ उपखंड में जनवरी से मई माह तक डॉग बाइट के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। अस्पतालों में प्रतिदिन औसतन 10 से अधिक मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। श्वानों के हमलों से लोगों के शरीर पर गंभीर घाव बन रहे हैं, जिनमें पैरों और हाथों पर चोटें अधिक देखी जा रही हैं।

किस माह में कितने जख्मी हुए

श्वानों के हमले में लक्ष्मणगढ़ सीएचसी में जनवरी में 149, फरवरी में 144, मार्च में 130, अप्रेल में 105 और मई में 152 मामले पहुंचे। इसी तरह हरसाना सीएचसी में जनवरी में 113, फरवरी में 125, मार्च में 87, अप्रेल में 80 तथा मई में 77 (23 मई तक) मामले सामने आए हैं।

व्यवहार में बदलाव से आक्रामक

विशेषज्ञों के अनुसार श्वानों की ओर से गंदे खाद्य पदार्थों का सेवन करने, उनकी बढ़ती संख्या तथा व्यवहार में बदलाव इनके आक्रामक होने का प्रमुख कारण है। बरसात के मौसम में स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है। इसका खमियाजा राहगीरों कोे भुगतना पड़ता है।

इधर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रूपेंद्र शर्मा का कहना है कि श्वानों के हमलों में बढ़ोतरी हो रही है। जिले के सभी अस्पतालों में एंटी रेबीज वैक्सीन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। रैबीज एक जानलेवा बीमारी है, जो श्वान की लार के माध्यम से पीडि़तव्य​क्ति के शरीर में तेजी से फैलती है।

सीएचसी लक्ष्मणगढ़ के चिकित्सा अधिकारी प्रभारी डॉ. ज्ञानेंद्र बंसल का कहना है कि श्वान के काटने पर घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से 10 से 15 मिनट तक धोना चाहिए। साथ ही तत्काल अस्पताल पहुंचकर एंटी रैबीज के इंजेक्शन लगवाना चाहिए, ताकि सुर​क्षित रहे।