
मंदिर में भजन-कीर्तन (फोटो - पत्रिका)
अलवर में भगवान जगन्नाथ महाराज के वार्षिक मेला महोत्सव को लेकर शहर में भक्ति की बयार बहने लगी है। सुभाष चौक स्थित ऐतिहासिक जगन्नाथ मंदिर में पारंपरिक दोज पूजन कार्यक्रम के साथ इस भव्य उत्सव की शुरुआत हो गई है। मंदिर के महंत देवेंद्र शर्मा ने बताया कि उत्सव के पहले दिन सुबह भगवान जगन्नाथ का विधि-विधान से महाभिषेक किया गया। इसके बाद 11 ब्राह्मणों की ओर से विशेष पाठ शुरू किए गए, जो 21 जुलाई तक लगातार चलेंगे।
दोज पूजन के मुख्य कार्यक्रम में पंडितों ने मंत्रोच्चारण के साथ भगवान जगन्नाथ को कंगन और डोरे बांधे। इस दौरान जगन्नाथ महिला मंडल की ओर से भगवान के मंगल और वैवाहिक गीतों की बेहद खूबसूरत प्रस्तुतियां दी गईं, जिससे पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो गया।
दोज पूजन के बाद इस कंगन-डोरे को भक्तों में प्रसाद के रूप में बांटा गया। अलवर में यह लोक मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ के इस सिद्ध कंगन-डोरे को धारण करने से अविवाहित कन्याओं के विवाह के योग जल्द बन जाते हैं। यही वजह है कि इसे लेने के लिए मंदिर में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
रथयात्रा महोत्सव को लेकर मंदिर में रोजाना सुबह से शाम तक भजन और सत्संग के कार्यक्रम चल रहे हैं। अलवर शहर ही नहीं, बल्कि आसपास के ग्रामीण इलाकों से भी बड़ी संख्या में भक्त भगवान के दर्शन करने पहुंच रहे हैं। उत्सव की अगली कड़ी में 18 जुलाई को सुबह 6:00 बजे से 72 घंटे का अखंड कीर्तन प्रारंभ होगा। अखंड कीर्तन शुरू होने के साथ ही अगले तीन दिनों के लिए भगवान जगन्नाथ के पट (कपाट) आम भक्तों के लिए बंद कर दिए जाएंगे।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन तीन दिनों में भगवान जगन्नाथ की 'दूल्हा रूप' में विशेष श्रृंगार सेवा की जाती है, जिसे बेहद गोपनीय रखा जाता है। इसके बाद 21 जुलाई की सुबह पाठ का समापन होगा और भगवान के पट दोबारा खोल दिए जाएंगे, जिसके बाद भक्त अपने आराध्य के दिव्य रूप के दर्शन कर सकेंगे।
इसी दिन मंदिर में भगवान का प्रसिद्ध 'भात कार्यक्रम' भी आयोजित किया जाएगा, जिसमें भगवान जगन्नाथ को छप्पन भोग लगाकर श्रद्धालुओं को पंचामृत का विशेष प्रसाद बांटा जाएगा। इसके बाद शहर में भगवान की भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी।
Updated on:
16 Jul 2026 12:31 pm
Published on:
16 Jul 2026 12:31 pm
