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Rajasthan HC Stay: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, संविदा सहायक प्रोफेसर भर्ती पर लगाई रोक

राजस्थान हाईकोर्ट ने कॉलेजों में काम कर रहे संविदा सहायक प्रोफेसरों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने पुरानी नियुक्तियों को सुरक्षित रखते हुए राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की ओर से निकाली गई नई संविदा भर्ती प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी है। इस फैसले से संविदा पर कार्यरत प्रोफेसरों में खुशी की लहर है।
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राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान कॉलेज शिक्षा सोसायटी के अधीन सरकारी महाविद्यालयों में कार्यरत संविदा सहायक प्रोफेसरों को राहत देते हुए उन्हें लंबित मामलों के अंतिम निस्तारण तक सेवा में बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की ओर से संविदा नियुक्तियों के लिए जारी भर्ती विज्ञापन को भी इन मामलों के निर्णय तक स्थगित रखने का आदेश दिया है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों का उल्लेख करते हुए कहा कि राजस्थान कॉलेज शिक्षा सोसायटी के महाविद्यालयों में गेस्ट फैकल्टी के रूप में कार्यरत सहायक प्रोफेसरों से जुड़े समान मामले पहले से कोर्ट के समक्ष विचाराधीन हैं। खंडपीठ के समक्ष कहा गया कि वर्तमान में संविदा पर कार्यरत होने के बावजूद विद्या संबल योजना के तहत राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की ओर से जारी विज्ञापन के आधार पर नए संविदाकर्मियों की नियुक्ति की जा रही है।

सहायक प्रोफेसर के रूप में कार्य

उन्होंने भर्ती प्रक्रिया संचालित करने के लिए बोर्ड की अधिकारिता पर भी सवाल उठाया। खंडपीठ ने कहा कि पहले से संविदा पर कार्यरत कर्मचारियों को हटाकर उनके स्थान पर नए संविदाकर्मियों की नियुक्ति करना न्यायोचित नहीं है। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की अधिकारिता भी चुनौती के दायरे में है। मामले की प्रकृति को देखते हुए कोर्ट ने निर्देश दिया कि सभी याचिकाकर्ता एवं अपीलकर्ता इन मामलों के अंतिम निर्णय तक सहायक प्रोफेसर के रूप में कार्य करते रहेंगे।

वृहद् पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने के निर्देश

खंडपीठ ने यह भी कहा कि भर्ती का विज्ञापन जारी हो चुका है और आवेदन भी प्राप्त हो चुके हैं, लेकिन जब तक कर्मचारी चयन बोर्ड की अधिकारिता का प्रश्न तय नहीं हो जाता, तब तक भर्ती विज्ञापन को लंबित मामलों के अंतिम निस्तारण तक स्थगित रखा जाएगा।

चूंकि, समान मामलों में समन्वय पीठ अलग दृष्टिकोण अपना चुकी है और यह विवाद पहले ही वृहद् पीठ को भेजा जा चुका है। इसलिए वर्तमान सभी मामलों को भी प्रशासनिक स्तर पर गठित वृहद् पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए गए। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज भंडारी, अधिवक्ता वर्षा बिस्सा व अन्य ने पैरवी की।


यह केवल कानूनी राहत नहीं

संघ के प्रदेश महामंत्री डॉ. नरेंद्र सिंह और उपाध्यक्ष डॉ. बी.पी. यादव ने कहा कि यह आदेश केवल कानूनी राहत नहीं, बल्कि वर्षों से उच्च शिक्षा में सेवाएं दे रहे हजारों विद्यासंबल सहायक आचार्यों के सम्मान, अधिकार और भविष्य की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

हरियाणा मॉडल पर रोजगार गारंटी की मांग

संघ के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. रवीन्द्र सिंह यादव ने कहा कि सरकार को बार-बार अस्थायी व्यवस्था बदलने के बजाय हरियाणा सरकार की तर्ज पर विद्या संबल सहायक आचार्यों की सेवा सुनिश्चित करते हुए रोजगार गारंटी देनी चाहिए। अस्थायी व्यवस्थाओं से उच्च शिक्षा का ढांचा कमजोर हो रहा है। उन्होंने मांग की है कि राजसेस के पदों पर डेपुटेशन के कारण विद्यासंबल सहायक आचार्यों को हटाने की प्रक्रिया भी बंद की जाए।