
शहर में सड़क में हुए गड्ढों का फोटो
अलवर शहर की सड़कों पर करीब 500 से ज्यादा गड्ढे हैं। यह खुलासा यूआइटी की ओर से हाल ही में कराए गए एआइ (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) सर्वे में हुआ है। ये गड्ढे जानलेवा साबित हो रहे हैं। आए-दिन हादसों का कारण बन रहे हैं। बुधवार को कलक्ट्रेट सभागार में हुई जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में यह मुद्दा उठा। जिला कलक्टर आर्तिका शुक्ला ने संंबंधित विभागों को तीन माह में इन गड्ढों को भरवाने के निर्देश दिए हैं।
यूआइटी यह सर्वे शहर में बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन एवं दुर्घटना संभावित बिंदुओं को चिह्नित करने के लिए कराया था। कलक्टर ने इस एआइ आधारित सर्वे की रिपोर्ट का यूआइटी सचिव से फीडबैक लिया। संबंधित विभागीय अधिकारियों को कलक्टर ने निर्देश दिए कि सर्वे के आधार पर संभावित एक्सीडेंट प्वाइंट्स पर आवश्यक सुरक्षात्मक कदम उठाएं। साथ ही, उन्होंने साइनेज, साइन बोर्ड, ब्रेकर आदि लगाने, सर्वे के आधार पर सड़कों पर चिन्हित अस्थायी अतिक्रमण को हटवाने, आवश्यक मार्किंग करवाने के निर्देश दिए। कलक्टर ने यूआइटी के अधिकारियों से कहा कि शहर में प्रवेश करने वाले मुख्य मार्गों पर (5 से 10 किमी तक) यातायात प्रबंधन के लिए विस्तृत सर्वे करें। उनकी मौजूदा हालत की रिपोर्ट दें। शहर में सड़कों पर पानी का भराव नहीं हो, इसके लिए नगर निगम और यूआइटी ड्रेनेज की व्यवस्था करें। भविष्य में सड़क निर्माण के समय ही ड्रेनेज का प्रस्ताव भी तैयार करें। सुरक्षा की दृष्टि से सड़क पर ड्रेनेज हॉल को ढकवाएं।
एक साल पहले किए गए टेंडर के बाद भी प्रतापबंध से माच का तिराहा की सड़क का निर्माण पीडब्ल्यूडी शुरू नहीं कर पाया है। विभाग का तर्क है कि बिटुमिन के रेट बढ़ने से ठेकेदार काम नहीं कर रहे हैं, जबकि जनता रोज धूल फांक रही है। जनता की मांग है कि नए सिरे से टेंडर कर दिया जाए ताकि नई दरों के मुताबिक कार्य हो जाए और राहत मिले। लोगों का कहना है कि वह हर दिन संभलकर चलते हैं, ताकि कोई हादसा न हो जाए। शहर विधानसभा की यह सड़क महत्वपूर्ण है। तमाम एनओसी के बाद यह मंजूर करवाई गई। खुद वन राज्यमंत्री संजय शर्मा ने पीडब्ल्यूडी को जल्दी सड़क निर्माण के लिए कहा, लेकिन अब तक शुरू नहीं हो पाया। हर दिन धूल उड़ रही है। दोपहिया वाहन आए दिन गिरकर चोटिल हो रहे हैं।
Updated on:
16 Jul 2026 11:13 am
Published on:
16 Jul 2026 11:13 am
