राजस्थान के अलवर जिले में अरावली पर्वतमाला में अवैध खनन का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि अरावली क्षेत्र को किसी भी तरह नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता, इसके बावजूद अलवर जिले में धड़ल्ले से अवैध खनन जारी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने तीन दिन […]
राजस्थान के अलवर जिले में अरावली पर्वतमाला में अवैध खनन का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि अरावली क्षेत्र को किसी भी तरह नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता, इसके बावजूद अलवर जिले में धड़ल्ले से अवैध खनन जारी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने तीन दिन पहले ही कहा है कि अरावली को छूने की अनुमति नहीं है। यानी अरावली को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता, लेकिन अलवर में अरावली की पहाड़ियों की नींव माफिया सिस्टम से मिलकर हिला रहे हैं।
पूरे जिले में चारों ओर अलग-अलग जगहों से 200 से 300 ट्रक अवैध खनन के लिए निकल रहे हैं। हैरत ये है कि इन्हें न खान विभाग रोकता है और न पुलिस प्रशासन। कमीशन के खेल में पूरा सिस्टम डूब गया और सुप्रीम कोर्ट के आदेश हवा में उड़ रहे हैं। झिरी व टहला से हर दिन रात को निकल रहे अवैध खनन के ट्रक अलवर के झिरी एरिया में माफिया चार अलग-अलग जगहों पर अरावली के पहाड़ के नीचे के हिस्से को काट रहे हैं।
यह खेल दिन में ही शुरू हो जाता है और रात को यहां से ट्रक निकलते हैं। जहां से ट्रक निकलते हैं, उस रास्ते पर पुलिस, वन विभाग चौकी और खनन विभाग से रजिस्टर्ड कांटे हैं, लेकिन इन्हें रोकने की हिम्मत किसी की नहीं होती। पिपलाई, जगन्नाथपुरा, समरा, कलसीकला में तेजी से अवैध खनन हो रहा है। हर दिन रात को 40 से अधिक ट्रक अवैध खनन के निकलते हैं। एक ट्रक में करीब 50 हजार का माल जाता है। टहला एरिया में भी 40 से अधिक ट्रक हर दिन निकल रहे हैं। यह भी अरावली की पहाडि़यों के नीचे ही खुदाई कर रहे हैं। पहाड़ को सीधा काट रहे हैं। यही नहीं यहां खनन नियमों को ताक में रखकर गहरे गड्ढे कर दिए गए है।
झिरी व आसपास में रवन्नों में भी जबरदस्त गड़बड़ी की जा रही है। यहां रवन्नों में समय ज्यादा डालकर कई चक्कर लगाए जा रहे हैं। उदाहरण के लिए अलवर के लिए अधिकतम चार से पांच घंटे का समय लगता है, लेकिन रवन्ना में सात घंटे डालकर एक चक्कर अलवर और दो से तीन चक्कर राजगढ़ व बापी के लगाकर राजस्व को चूना लगाया जा रहा है।
हैरत तो यह है कि सरकार ने अवैध खनन को रोकने के लिए खान विभाग बनाया है, लेकिन इस विभाग की मेहरबानी से ही यह पूरा खेल चल रहा है। लंबे समय से यहां इंजीनियर तैनात हैं, जिन्हें बड़े नेताओं की शह मिली हुई है। खान विभाग के अधिकारी कुछ गिने-चुने ट्रक पकड़कर कार्रवाई दिखाकर इतिश्री कर लेते हैं। प्रशासन भी इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रहा है, जबकि संयुक्त टीम बनाकर इस पर एक्शन की जरूरत है। पूरे देश में अरावली का मुद्दा छाया हुआ है, लेकिन नुकसान अलवर से ही हो रहा है। यहीं से केंद्रीय वन मंत्री व वन राज्यमंत्री आते हैं, लेकिन अफसरों में उनका कोई खौफ नहीं है।
सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने 12 फरवरी को कहा,हम किसी को भी अरावली की पहाड़ियों को छूने की अनुमति नहीं देंगे। जब तक अरावली की परिभाषा पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक वहां एक ईंट भी नहीं हिलेगी। इस टिप्पणी के बाद कोर्ट के आदेश की पालना प्रशासन को करानी थी, लेकिन यहां किसी को इसकी परवाह नहीं है।
हमने इन एरिया में अपनी टीम लगाई हुई हैं। अवैध खनन पर कार्रवाई होती है और आगे भी जारी रखेंगे - मनोज शर्मा, खनिज अभियंता