अलवर

अलवर में यहां पांच साल से आंखों के इलाज पर लटका ताला, परेशान हो रहे मरीज

अलवर में यहां आंख का इलाज 5 साल से बंद है, इससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

2 min read
Feb 17, 2018

बहरोड़. कस्बे में नेत्र रोगियों को इलाज मुहैया करवाने के उद्देश्य से राजकीय रेफरल चिकित्सालय में बीस साल पहले नेत्र चिकित्सालय खोला गया। चिकित्सालय खुलने के बाद नेत्र रोगियों को इलाज के लिए बाहर चक्कर नहीं लगाने पड़े, लेकिन गत पांच वर्षों से इस चिकित्सालय पर नेत्र विशेषज्ञ के अभाव में ताला लटका पड़ा है। ऐसे में आंखों के रोगी परेशान होकर निजी अस्पतालों में जाने को मजबूर हैं।

बीस साल पहले नेत्र अस्पताल का अलग से भवन बना कर आधुनिक उपकरणों के साथ लगभग बीस लाख रुपए खर्च कर अस्पताल शुरू किया गया था। नेत्र अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरेन्द्र यादव ने 2013 में त्याग पत्र दे दिया, जिसके बाद से अस्पताल बंद पड़ा है। उस समय अस्पताल में विशेषज्ञ के अलावा 4 नर्सिंग स्टाफ था जिनको बाद में अस्पताल में अन्य कार्यों पर लगा दिया गया।कहने को तो सरकार ने कस्बे के सरकारी अस्पताल को सौ बेड का अस्पताल बना दिया, लेकिन नेत्र विशेषज्ञ नहीं होने से मरीजों को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा है।

जंग खा रहे लाखों रुपए के उपकरण

नेत्र अस्पताल बंद रहने से ऑपरेशन थियेटर में लगे लाखों रुपए के उपकरण व अन्य मशीनें पांच साल से उपयोग में नहीं आने से खराब हो रही हंै। नेत्र अस्पताल का अन्य सामान भी धूल खा रहा है। फर्नीचर व अन्य सामान भी बदहाल हो गया है।

रोजाना आते थे तीन सौ रोगी

नेत्र अस्पताल जब सुचारू रूप से संचालित था, तब कस्बा सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्र से रोजाना तीन सौ से ज्यादा आंखों के रोगी आते थे। रोजाना शाम को अस्पताल में ऑपरेशन भी किए जाते थे, जिनको सारी सुविधाएं नि:शुल्क मिलती थी। अब अस्पताल बंद रहने के कारण मरीजों को परेशानी हो रही है।

नेत्र अस्पताल का आधुनिक भवन नेत्र रोग विशेषज्ञ के नहीं होने से बंद पड़ा है। मरीजों को हो रही परेशानी को देखते हुए उच्च अधिकारियों से नेत्र रोग विशेषज्ञ लगाने की मांग की जा रही है।
डॉ. सुरेश यादव, प्रभारी, राजकीय चिकित्सालय बहरोड़

Published on:
17 Feb 2018 10:05 am
Also Read
View All